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मणिपुर

मणिपुर: हथियारों की लूट, सुरक्षाबलों पर FIR, और अब 15 अगस्त का बहिष्कार!

आज पूरा देश जब स्‍वतंत्रता दिवस मना रहा है, मणिपुर में सतरह घंटे की बंदी है। मैतेयी सशस्‍त्र संगठन कॉरकॉम ने स्‍वतंत्रता दिवस के बहिष्‍कार का आह्वान कर दिया है। कुछ संगठनों ने 14 अगस्‍त को ही अपनी आजादी का दिवस मना लिया है। 3 मई से शुरू हुई हिंसा सरकारी हथियारों की लूट से लेकर सशस्‍त्र बलों पर एफआइआर और पुलिस के साथ तनाव में तब्‍दील होते हुए इस स्थिति त‍क आखिर कैसे पहुंच गई जबकि पिछले ही हफ्ते कुकी नेता गृहमंत्री से दिल्‍ली में मिलकर गए हैं? मणिपुर से लौटकर रोहिण कुमार की श्रृंखला की तीसरी कड़ी

मणिपुर: पचहत्तर दिन बाद लीक हुआ वीडियो घटना के वक्त दबा कैसे रह गया?

मणिपुर में हिंसा भड़कने के ठीक बाद दो कुकी महिलाओं का गैंगरेप और निर्वस्‍त्र परेड हुआ था, जिसका वीडियो ढाई महीने बाद लीक हुआ। तब तक सरकारी आंकड़े के मुताबिक डेढ़ सौ लोग मारे जा चुके थे। इसके बावजूद देश की संवेदना नहीं जगी थी। सवाल उठता है कि जब घटना की जानकारी मणिपुर में आम थी, तो वह मई में ही खबर क्‍यों नहीं बन सकी? मणिपुर से लौटकर आए रोहिण कुमार की श्रृंखला की दूसरी कड़ी

1. इंफाल में मैतेयी समुदाय का धरना प्रदर्शन | 2 जुलाई | रोहिण कुमार

मणिपुर: आग लगाने की तैयारी तो पहले से थी, 3 मई की रैली होती या नहीं…

मणिपुर में दो समुदायों के बीच हिंसा को जल्‍द ही तीन महीने पूरे हो जाएंगे। प्रधानमंत्री ने केवल एक वाक्‍य अब तक कहा है, वो भी संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले, संसद के बाहर, भीतर नहीं। सुप्रीम कोर्ट शुरू में लापरवाह रहा, फिर सख्‍त हुआ, लेकिन उसका कुछ हासिल नहीं है। उधर, दर्द और हिंसा की कहानियां दोनों तरफ से बराबर आ रही हैं। संवेदना पाले में बंट गई है। सच्‍चाई धुंधली हो गई है। ऐसे में मणिपुर से लौटकर रोहिण कुमार सुना रहे हैं आंखों देखी, कानों सुनी और महसूस की हुई कहानियां किस्‍तों में। पहली कड़ी प्रस्‍तुत है

मणिपुर: ‘राजकीय हिंसा’ पर बहस के लिए SC ‘सही मंच नहीं’, मीडिया में बोलने वालों पर FIR

आज सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई में मणिपुर की हिंसा से अपना पल्‍ला पूरी तरह झाड़ लिया और इसे राज्‍य सरकार का मसला करार दिया। मणिपुर के विभिन्‍न समूहों की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्‍य न्‍यायाधीश चंद्रचूड़ और और पीएस नरसिम्‍हा की पीठ ने साफ कहा कि वह राज्‍य में कानून व्‍यवस्‍था का मसला अपने हाथ में नहीं सकती, ज्‍यादा से ज्‍यादा अधिकारियों को हालात बेहतर करने के सुझाव दे सकती है।

मणिपुर: दिन पचास पार, मौतें सौ पार, प्रधानमंत्री सीमापार

एक हफ्ते से ज्‍यादा वक्‍त से मणिपुर के विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए दिल्‍ली में डेरा डाले हुए हैं लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पाई है। प्रधानमंत्री अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच कांग्रेस संसदीय बोर्ड की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज एक यहां संदेश जारी किया है और शांति व सौहार्द की अपील की है।

Gargi Chakraborty

हम दिल्ली में उनकी बाट जोहते रहे, वे कोलकाता से ही कॉमरेड सुमित के पास चली गईं…

प्रतिष्ठित इतिहासकार, महिला और कम्‍युनिस्‍ट आंदोलन की महत्‍वपूर्ण आवाज डॉ. गार्गी चटर्जी बीते 2 मार्च को नहीं रहीं। उनका 78 वर्ष की उम्र में कोलकाता में निधन हो गया। अभी साल भर भी नहीं हुआ उनके जीवनसाथी सुमित चक्रवर्ती को गुजरे हुए जो साप्‍ताहिक पत्रिका मेनस्‍ट्रीम के संपादक हुआ करते थे और देश के बौद्धिक समाज के भीतर बचे-खुचे चुनिंदा नैतिक स्‍वरों में एक थे। सुमित चक्रवर्ती और गार्गी चक्रवर्ती के साथ अपनी मुलाकातों, संस्‍मरणों और प्रसंगों पर श्रद्धांजलि-स्‍वरूप विनीत तिवारी की टिप्‍पणी

Women fetching water in Barmer, Rajasthan

पानी केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, अब वह न्याय का प्रश्न बन चुका है! पी. साईनाथ का व्याख्यान

गुरुत्‍वाकर्षण के हिसाब से पानी ऊपर से नीचे की ओर बहता है, लेकिन हजारों साल से जाति, वर्ग और लैंगिक भेदों के मारे भारतीय समाज में यह नियम उलट जाता है। यहां पानी नीचे से ऊपर प्रवाहित होता है। यानी, निचले तबके पानी के लिए श्रम करते हैं और ऊंचे तबके उनका पानी हड़प लेते हैं। यह उलटा प्रवाह जब पानी के निजीकरण के साथ मिलता है तो भयावह असमानता का बायस बन जाता है। फिर पानी महज कुदरती संसाधन नहीं, न्‍याय का सवाल बन जाता है। वरिष्‍ठ पत्रकार पी. साईनाथ का व्‍याख्‍यान ‘पानी का रंग: खत्‍म होता एक प्राकृतिक संसाधन और बढ़ती असमानता’

RSS-BJP

संघ-भाजपा समन्वय सूत्र : सत्ता सर्वोपरि, हिन्दुत्व बोले तो वक्त की नजाकत और पब्लिक का मूड!

आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत चार-छह महीने के अंतराल पर बौद्धिक कसरत के लिए कोई न कोई बयान दे देते हैं। आम चुनाव के दौरान संघ पर भाजपा की निर्भरता खत्‍म होने संबंधी जेपी नड्डा के औचक बयान के बाद बयानबाजियों और अटकलबाजियों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसमें संघ-भाजपा के परस्‍पर शक्ति संतुलन को लेकर अजीबोगरीब निष्‍कर्ष निकाले गए। बावजूद इसके, भाजपा चुनाव जीतती गई। केवल उत्‍तर प्रदेश अपवाद रहा, जहां के संभल के संदर्भ में भागवत का एक बयान लंबे समय बाद आया है और संघ-भाजपा के रिश्‍तों पर फिर से पहेलियां बुझायी जा रही हैं। ‘आत्‍मनिर्भर भाजपा’ शीर्षक से 27 मई को लिखे अपने लेख का ‍सिरा पकड़ कर व्‍यालोक ने एक बार फिर इस मसले को नई रोशनी में देखने की कोशिश की है

Representational picture of left flag between BJP

पश्चिम बंगाल: पुराने गढ़ जादवपुर में राम और अवाम की लड़ाई में भ्रमित वाम

पश्चिम बंगाल के आखिरी चरण में मतदान कोलकाता और उसके आसपास भद्रलोक के इलाके में पहुंच रहा है। यहां का अभिजात्‍य वाम समर्थक बौद्धिक वर्ग जहां इस बार उदासीन दिखता है, वहीं गांव-कस्‍बों के लोगों के बीच तृणमूल के कल्‍याणकारी लाभों की चर्चा है जबकि भाजपा उसके भ्रष्‍टाचार को मुद्दा बनाए हुए है। जमीन से नित्‍यानंद गायेन की रिपोर्ट