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मणिपुर

A demonstrator holds a placard during a protest against the release of the convicts in Bilkis Bano case

नए भारत में बलात्कारियों का संरक्षण : कैसे अच्छे दिन? किसके अच्छे दिन?

बीते कुछ बरसों के दौरान भारत में यौन अपराधों और इनके केस में सजा होने के बीच बहुत गहरी खाई पनपी है। पीड़ितों की खुदकशी से लेकर उन्‍हीं पर पलट कर मुकदमा किया जाना, अपराधियों का माल्‍यार्पण, सरवाइवर के बयान पर संदेह खड़ा किया जाना, और आखिरकार सजा मिलने पर भी बलात्कारियों का जमानत पर बाहर निकल आना दंडमुक्ति की फैलती संस्कृति का पता देता है। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने से पहले राज्यसत्ता और पितृसत्ता ने इसकी जमीन बना दी थी। नारीवादी लेखिका-कार्यकर्ता रंजना पाढ़ी की विस्तृत पड़ताल

‘बुराई को रोजमर्रा की मामूली चीज बना दिया गया है और चेतावनी का वक्त जा चुका है’!

अपने निबंध संग्रह ‘आज़ादी’ के फ्रेंच अनुवाद के लिए अरुंधति रॉय द्वारा 2023 यूरोपियन एस्से प्राइज़ फ़ॉर लाइफ़टाइम एचीवमेंट स्वीकार करते समय लौज़ान, स्विट्ज़रलैंड में दिए गए भाषण के प्रासंगिक अंश। अनुवाद रेयाज़ुल हक़ ने किया है।

G-20 के लिए लोगों को उजाड़ने के खिलाफ बोलना भी जुर्म, दिल्ली में रुकवा दिया गया We-20 सम्मेलन

दिल्‍ली से लेकर वृंदावन, अयोध्‍या, बनारस, ओडिशा, बंगाल यानी समूचे देश में लोगों को उजाड़ा जा रहा है। बहाना है आगामी सितंबर में होने वाला जी-20 शिखर सम्‍मेलन और उसके लिए शहरों का सुंदरीकरण। इस बेदखली, विस्‍थापन और बेघरी के खिलाफ 700 से ज्‍यादा लोग दिल्‍ली में तीन दिन बंद कमरे में विचार-विमर्श करने को जुटे थे। दिल्‍ली पुलिस ने दूसरे दिन माहौल बिगाड़ा और तीसरे दिन के सत्र को होने ही नहीं दिया। यह सम्‍मेलन आधे में ही खत्‍म हो गया।

प. बंगाल: भाजपा की याचिका में अटक गया पंचायत चुनाव परिणाम, ममता के निशाने पर ‘राम, श्याम, वाम’

पंचायत चुनावों में हिंसा को लेकर अदालत का रुख शुरुआत से ही बहुत सख्त बना हुआ है। चुनाव संपन्न होने के बाद पूरी चुनावी प्रक्रिया में हिंसा और गड़बड़ी को लेकर अदालत में तीन जनहित याचिकाएं दाखिल हुई थीं जिन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बुधवार को चुनाव नतीजे अपने अधीन कर लिए

प. बंगाल: पंद्रह लाशों के ढेर पर लोकतंत्र के पंचवर्षीय नृत्य का सज चुका है मंच

पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव के लिए प्रचार गुरुवार, 6 जुलाई की शाम को समाप्त हो गया। मतदान कल होना है। नतीजे 11 जुलाई को घोषित होंगे। कुल मिलाकर अब तक 15 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। हाइकोर्ट ने मतगणना समाप्त होने के बाद 10 दिनों तक केंद्रीय बलों को राज्य में तैनात रखने का निर्देश दिया है।

तमिलनाडु: राज्यपाल का द्रविड़ प्राणायाम और एक सनातन संवैधानिक संकट

बिहार के रहने वाले पूर्व खुफिया अधिकारी रवि को जब नगालैंड से तमिलनाडु भेजा गया था, तभी कुछ नेताओं ने इस नियुक्ति को राजनीतिक करार दिया था। रवि ने इन तमाम आशंकाओं को बीते दो साल में सच साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अबकी सीधे मंत्री को बर्खास्त कर के उन्होंने साफ बता दिया है कि वे किसके लिए काम कर रहे हैं। घटना नई है, रीत पुरानी।

पत्रकारों का सरकारी उत्पीड़न बढ़ा, 2022 में 194 पत्रकार हमलों का शिकार: RRAG

बीते 27 जून को जारी एक विज्ञप्ति में आरआरएजी ने बताया कि 194 में से 103 पत्रकारों को राजकीय हमले का शिकार होना पड़ा जबकि 91 पत्रकारों को राजनीतिक कार्यकर्ताओं और राज्‍येतर इकाइयों ने अपना निशाना बनाया।

पश्चिम बंगाल: सबसे ज्यादा नामांकन के बावजूद सुप्रीम कोर्ट पहुंची तृणमूल सरकार

इतिहास गवाह है कि केंद्रीय बल हों चाहे केंद्रीय पर्यवेक्षक अथवा राष्‍ट्रीय मीडिया और अदालती निर्देश, बंगाल की राजनीतिक जमीन पर चुनावी हिंसा के आड़े कुछ भी नहीं आता। नब्‍बे के दशक में मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त टीएन शेषन इकलौते थे जिन्‍होंने यहां शांतिपूर्ण चुनाव करवाए, लेकिन वह बंगाल की राजनीतिक परंपरा में एक अपवाद ही कहा जाएगा। ताजा चुनावी हिंसा पर कोलकाता से नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट

आर्थिक बदलाव कैसे धार्मिक-जातीय दंगे में बदल जाते हैं?

ऊपरी तौर से देखने पर भले लगे कि समाज में होने वाली हिंसा, टकरावों, संघर्षों, आंदोलनों और दंगों के पीछे राजनीतिक पार्टियों की सत्तालोलुपता और धार्मिक कट्टरपंथियों की महत्वाकांक्षा की भूमिका है, लेकिन मामला कुछ और ही होता है। डेढ़ सौ साल का आधुनिक इतिहास इसकी गवाही देता है। हिंसा और दंगे के आर्थिक इतिहास को खंगाल रहे हैं अरुण सिंह