पूंजी के राज में मजदूर कैसे बेदखल और अदृश्य हो गया? अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार का व्याख्यान
byमौजूदा दुनिया में जब भी मजदूरों की बात होगी, सबसे बुनियादी अंतर्विरोध पूंजी बनाम श्रम से ही बात उठेगी। पिछले सौ साल में कैसे पूंजी की बढ़ती हुई ताकत ने श्रमिकों को संगठित होने से रोका, कमजोर किया, कभी उनके संगठित होने का फायदा उठाया तो कभी उन्हें बिखेर दिया, यह न सिर्फ पूंजीवाद बल्कि मजदूर आंदोलन का भी इतिहास है। इसी इतिहास की रोशनी में और भारत के असंगठित मजदूरों के खास संदर्भ में आज की दुनिया और भविष्य के खतरों पर अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार ने दिल्ली में 5 जून 2026 को एक लंबा व्याख्यान दिया। व्याख्यान जेएनयू में उनके सहपाठी रहे शिक्षाविद अनिल चौधरी की स्मृति में था। उस व्याख्यान का लिप्यंतरित, संक्षिप्त और संपादित रूप