Culture

A demonstrator holds a placard during a protest against the release of the convicts in Bilkis Bano case

हिन्दुत्व, नवउदारवाद और यौन अपराधियों को बचाने की नकली सामूहिक चेतना का उदय

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बीते कुछ बरसों के दौरान भारत में यौन अपराधों और इनके केस में सजा होने के बीच बहुत गहरी खाई पनप गई है। पीड़ितों की खुदकशी से लेकर उन्‍हीं पर पलट कर मुकदमा होना, अपराधियों को माला पहनाया जाना, सरवाइवर के बयान पर संदेह खड़ा किया जाना, और आखिरकार सजा मिलने पर भी बलात्‍कारियों का जमानत पर बाहर निकल आना दंडमुक्ति की फैलती संस्‍कृति का पता देता है। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने से पहले राज्‍यसत्‍ता और पितृसत्‍ता ने इसकी जमीन बना दी थी। नारीवादी लेखिका-कार्यकर्ता रंजना पाढ़ी की विस्‍तृत पड़ताल

A view of Saryu river in Ayodhya from Ghats

रामराज में नौका विहार : चार माह बाद नई अयोध्या का एक ताज़ा सफरनामा

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इस आम चुनाव में राम मंदिर यदि वाकई कोई मुद्दा था, तो आज उसको भुनाये जाने की अंतिम तारीख है। आज अयोध्‍या के लोग वोट डाल रहे हैं। बरसों के संघर्ष के बाद भगवान राम पुनर्वास हुआ तो, तो रामाधार का आधार ही छिन गया है और वह वनवास पर चला गया है। 2024 की अयोध्‍या इंसान की सामूहिक विडम्‍बनाओं का नाम है, ऐसा यहां घूमते हुए प्रतीत होता है। राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्‍ठा के चार महीने बाद सफरनामे की शक्‍ल में नीतू सिंह की फॉलो-अप रपट

Mother of a victim of Hamirpur Double Rape 2024 in her home

यूपी : बेहतर कानून व्यवस्था के छद्म को भेद रहा है आधी आबादी पर फैलता हुआ अंधेरा

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उत्‍तर प्रदेश में भाजपा को वोट देने का इकलौता कारण बेहतर लॉ ऐंड ऑर्डर का दावा है। इस दावे के पीछे दर्जनों आत्‍महत्‍याएं और हजारों बलात्‍कार छुपा लिए गए हैं। कानून वाकई इतना चाक-चौबंद है कि बलात्‍कार के बाद लड़कियां रहस्‍यमय ढंग से मर जा रही हैं, उनके बाप इंसाफ न मिलने पर खुदकशी कर ले रहे हैं और पुलिस दोनों को आत्‍महत्‍या बताकर केस बंद कर दे रही है। बीती फरवरी में हुआ हमीरपुर डबल रेप कांड ऐसी ही तीन मौतें लेकर आया था। चार दशक बाद कोई प्रधानमंत्री हमीरपुर गया, लेकिन केवल नदी जोड़ने की बात कर के चला आया। बलात्‍कृत-मृत दलित लड़कियों के टूटे हुए परिजन ताकते ही रह गए। नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

Unnao Gangrape 2022 victim's house

उन्नाव गैंगरेप 2022 : चुनाव आ गया, इस दरवाजे अब तक कोई नहीं आया…

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उन्‍नाव में चुनाव है। हाथरस में हो चुका। बांदा में 20 मई को होना है। ऐसे तमाम शहरों को एक चीज जोड़ती है- बलात्‍कार। बीते बरसों में उत्‍तर प्रदेश में जितने जघन्‍य रेप कांड हुए हैं, और कहीं नहीं हुए। सबसे ज्‍यादा हल्‍ला भी यहीं मचा। ज्‍यादातर कांड दलित औरतों के साथ हुए हैं। विडम्‍बना है कि इस आम चुनाव में दलित वोटों के पीछे पड़े सत्‍ता और विपक्ष दोनों को वे दलित परिवार याद नहीं जो बरसों से अपने ही घर में कैद हैं, घुट रहे हैं, लगातार जुल्‍म झेल रहे हैं। ग्‍यारह साल की दलित बच्‍ची से 2022 में उन्‍नाव में हुए गैंगरेप पर नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

Portrait of Satyajit Ray by Rishiraj Sahoo in 1997

…जिनके दामन पर ऑस्कर से आसक्ति एक धब्बे की तरह चिपक गई!

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भारत के कुछ फिल्‍मकारों और सिनेमा-दर्शकों के एक वर्ग को अगर किसी एक व्‍यक्ति ने ऑस्‍कर पुरस्‍कारों के बारे में भ्रमित किया कि इस पुरस्‍कार को पाना पुनर्जन्‍म होने के जैसा है, तो वह सत्‍यजित राय थे। ऑस्‍कर से उनकी आसक्ति ऐसी रही कि अपने देश में मिले ढेर सारे प्‍यार, सराहना और सम्‍मानों के बारे में कहने को उनके पास कभी खास शब्‍द नहीं थे। विद्यार्थी चटर्जी की टिप्‍पणी

Behmai police check post that was established post massacre in 1981

बेहमई : इंसाफ या 43 साल के शोक का हास्‍यास्‍पद अंत?

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पचहत्‍तर साल के लोकतंत्र में तैंतालीस साल पुराने एक मुकदमे में एक फैसला आया है। मुकदमे में दोनों पक्ष के ज्‍यादातर लोग सिधार चुके हैं। कानपुर के पास बेहमई गांव में बीस लोगों की सामूहिक हत्‍या के आरोप में जिस इकलौते शख्‍स को सजा हुई, वह अस्‍सी साल का है। तीन पीढ़ियां जब अपने पितरों का शोक मनाते गुजर चुकी हैं, तो न्‍याय ऐसा मिला है जिसके जोर से एक पतंग भी न उड़ पाए। कोर्ट ऑर्डर की प्रति भी यहां पहुंचेगी कि नहीं, शक है क्‍योंकि इस गांव में एक अदद सड़क नहीं है। बेहमई से लौटकर नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

Dhai Akhar team reaches Kim

ये वो गुजरात नहीं है जिसे कभी हिन्दू राष्ट्र की प्रयोगशाला कहा गया था…

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मध्‍य प्रदेश में अपना खास मुकाम हासिल करने के बाद ‘ढाई आखर प्रेम के’ नामक सांस्‍कृतिक यात्रा जब गुजरात पहुंची तो यात्रियों के मन में संदेह, भय और उत्‍तेजना मिश्रित भाव था। साबरमती से शुरू होकर जत्‍था जैसे-जैसे आगे बढ़ता गया, मन में एक नया सवाल घुमड़ता रहा कि ये तो 2002 वाला गुजरात नहीं है और शायद वैसा बनाया भी नहीं जा सकता, जैसी इसकी छवि है। समूची यात्रा में आयोजक, भागीदार और दस्‍तावेजकार के रूप में निरंतर शामिल रहे विनीत तिवारी का संस्‍मरणात्‍मक रिपोर्ताज

पहली बार खादी बुनने वाली श्रमिक महिलाओं का फैशन शो

मध्य प्रदेश: एक यात्रा के बहाने श्रम, प्रेम और ज्ञान की साझा संस्कृति के जिंदा होने की शिनाख्त

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एक धार्मिक राजतंत्र की शक्‍ल लेते इस राष्‍ट्र में साझा संस्‍कृति को बचाने की चिंताएं तो सर्वत्र हैं, लेकिन प्रयास उतने ही कम हैं। इस जटिल परिदृश्‍य में श्रम की महत्‍ता, ज्ञान की आवश्‍यकता और प्रेम की अनिवार्यता को आपस में कैसे पिरोया जाए, इस पर एक प्रयोग आजकल ‘ढाई आखर प्रेम के’ नाम के सांस्‍कृतिक जत्‍थे के माध्‍यम से चल रहा है। यह जत्‍था मध्‍य प्रदेश पहुंचकर कुछ कारणों से खास बन गया, आगे के लिए नजीर बन गया। समूची यात्रा में आयोजक, भागीदार और दस्‍तावेजकार के रूप में निरंतर शामिल रहे विनीत तिवारी का संस्‍मरणात्‍मक रिपोर्ताज

राम घर आ रहे हैं, कौशल्या फुटपाथ पर हैं! पुरुषोत्तम और जगन्नाथ भी…

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यह सच है कि अठारह सौ करोड़ की लागत से बन रहा राम मंदिर, तीस हजार करोड़ की लागत से हो रहा अयोध्‍या का विकास और अपेक्षित तीन लाख श्रद्धालुओं के भारी-भरकम आंकड़े से यहां के रेहड़ी-पटरी वालों और दुकानदारों का काम-धंधा बढ़ेगा। यह भी सच है कि राम मंदिर के कारण अपनी रोजी-रोटी कमा पा रहे लोग मंदिर बनने से खुश हैं। इसके बाद तीसरा सच भी कुबूल कर ही लेना चाहिए- कि हजारों लोगों से उनकी दुकानें छिन गई हैं और जब धंधा बढ़ने का मौका आया है ठीक तभी वे फुटपाथ पर डाल दिए गए हैं। अयोध्‍या से नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

‘पॉप’ हिंदुत्‍व: तीन संस्‍कारी नायक और उनकी कुसांस्‍कृतिक छवियां

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भारतीय जनता पार्टी के जन्‍म से ही उसके चुनावी घोषणापत्रों का पहला वादा रहे अयोध्‍या के राम मंदिर में जब प्राण प्रतिष्‍ठा को कुछ दिन ही बच रहे हैं, तब धर्म और शास्‍त्रोक्‍त पद्धतियों पर बहस छिड़ी हुई है। सच्‍चाई यह है कि हिंदू धर्म के रूढ़ हो चुके संस्‍थागत स्‍वरूप को त्‍यागकर उसे लोकप्रिय व सर्वग्राह्य बनाने से भाजपा का यह प्रोजेक्‍ट पूरा हुआ है। नए मीडिया में विभिन्‍न लोकरंजक विधाओं के माध्‍यम से हिंदुत्‍व के प्रचार-प्रसार पर बहुत कम अध्‍ययन हुआ है। इसी विषय पर कुणाल पुरोहित की लिखी पुस्‍तक ‘एच-पॉप’ पर चर्चा कर रहे हैं अतुल उपाध्‍याय