क्या लोकतंत्र में तानाशाही को संवैधानिक रूप से बैन किया जा सकता है? एक जरूरी सबक
क्या लोकतंत्र में एक अलोकतांत्रिक दल पर प्रतिबंध की कार्रवाई करना अलोकतांत्रिक है? यह दुविधा कम से कम सौ साल पुरानी है, लेकिन इसे हल करने की मिसाल 1950 के दशक के जर्मनी में मौजूद है। जब लोकतंत्र को निगल जाने वाली तानाशाही ताकत चुनावी रास्ते से सत्ता में आ जाए, तो संविधान और अदालतें बहुत कुछ ऐसा कर सकती हैं जिससे लोकतंत्र में स्वस्थ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की बहाली हो सके। प्रिंस्टन में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर यान-वर्नर म्यूलर की प्रासंगिक टिप्पणी, प्रोजेक्ट सिंडिकेट के सौजन्य से