Benares

Kashi

पुस्तक अंश : बनारस की ‘अदृश्य औरतों’ को सुने बगैर इस शहर को क्यों नहीं समझा जा सकता?

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बनारस या काशी पर अतीत से लेकर अब तक जितनी किताबें लिखी गई हैं, भारत में उसका कोई जोड़ नहीं है। तकरीबन हर मशहूर किताब काशी की शाश्‍वत और पवित्र छवि को ही उभारती है। काल प्रवाह में जम चुकी बनारस की इस छवि पर आलोचनात्‍मक शब्‍द कम लिखे गए हैं। फ्रंटपेज प्रकाशन से शीघ्र प्रकाशित होने वाली लेनिन रघुवंशी, चंद्र मिश्रा और श्रुति नागवंशी द्वारा सह-लिखित ‘काशी’ इस मायने में पुरानी लीक को न सिर्फ तोड़ती है, बल्कि बन और बिगड़ रहे बनारस पर एक बार फिर से सोचने को मजबूर करती है। कुल 12 अध्‍यायों में बंटी अंग्रेजी में लिखी यह पुस्‍तक धर्म और मिथक से लेकर सामान्‍य जीवन में छुपे प्रतिरोध के दर्शन, जाति-वर्ग-लिंग से लेकर बाजार तक बंटवारे की राजनीति और उम्‍मीद के संभावित तत्त्वों पर एक जटिल सूत्रीकरण है। प्रकाशक और लेखकों की अनुमति से पुस्‍तक के सातवें अध्‍याय से चुने हुए कुछ अनूदित अंश

Manikarnika in its original form, 2019

खंडित हुआ महादेव का त्रिशूल: काशी विध्‍वंस के नये अध्‍याय मणिकर्णिका पर भ्रम-खंडन

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पिछले दिनों बनारस के मणिकर्णिका घाट पर तोड़ी गई अहिल्‍याबाई होल्‍कर की प्रतिमा को लेकर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जो बवाल मचा, उसके बाद इस घटना को झूठा ठहराने के कई प्रयास हुए। जब संस्कृति बनाम विकास पर बहस उठी, तो इस क्रम में कुछ ऐसा लेखन सामने आया जिसमें पौराणिक और मिथकीय सूत्रों के हवाले से मणिकर्णिका घाट पर चल रही तोड़फोड़ को आधुनिक विकास के मुहावरे में उचित या स्‍वाभाविक ठहराया गया। ऐसी मिथकीय कुव्‍याख्‍याओं के भ्रमजाल को तोड़ते हुए काशी की संस्‍कृति और जन के हक में कुछ तथ्‍यात्‍मक बातें बता रहे हैं बनारस से वरिष्‍ठ पत्रकार अजय राय

अकेले अकेले के खेल में: संगम पर दम तोड़ रहा है नाव, नदी और नाविक का रिश्ता

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इलाहाबाद के संगम पर इस साल केवल दो नावें बनी हैं। रोजी-रोटी की तलाश में नाविकों ने दूसरे सूबों का रुख कर लिया है। बनारस में गंगा पर क्रूज और वाटर टैक्‍सी चली, तो मल्‍लाहों ने क्रूज को घेर लिया, फिर नाव बांध दिए और हड़ताल पर चले गए। नदी, नाव और नाविक को अलग-अलग बांट कर देखने और बरतने वाले इस निजाम में हर नदी के किनारे गरीबी और वंचना की कहानियां बिखरी हुई हैं। इस सब के बीच नाव बनाने की कला ही लुप्‍त हो रही है। इलाहाबाद से गौरव गुलमोहर की लंबी कहानी