Gen Z

BJP, Bengal and Gen Z still in a single frame

बंगाल: सौ दिन की सरकार, GenZ की फुहार और दिसंबर का मौन इंतजार

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बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को बने सौ दिन पूरे हो गए। वैसे तो इस प्राचीन महादेश में पचास साल में भी कुछ खास नहीं बदलता, पर हर नई सरकार का रिपोर्ट कार्ड जांचने की पुरानी पत्रकारीय रवायत भी है। यहां सरकार भले मई में बदल चुकी थी, लेकिन उसके ठीक बाद हुए जेन ज़ी आंदोलन ने सिर मुंड़ाते ओले पड़ने की कहावत चरितार्थ कर दी। नतीजा- ऊपरी बदलावों को छोड़ दें, तो बंगाल में फिलहाल सब कुछ ठहरा हुआ है या कहें जस का तस है। हर कोई अपने वक्‍त के इंतजार में एक-दूसरे को ताड़ रहा है। बीते एक साल से बंगाल पर करीबी निगाह रखे अमन गुप्‍ता की फॉलो-अप रिपोर्ट

RSS Chief Shri Mohan Bhagwat

GenZ-भागवत संवाद : काल के कठघरे में खड़ा संघ और सवाल पूछता नए दौर का प्रतिवादी

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सत्ता के ऊपर फुलप्रूफ नियंत्रण के बावजूद देश में स्थितियां कुछ ऐसी बन चुकी हैं कि न सिर्फ पांचसाला चुनाव लड़ने वाली भाजपा, बल्कि भविष्‍य को अपने वैचारिक निर्धार के हिसाब से गढ़ने वाली उसकी मातृसंस्‍था आरएसएस भी बेचैन है। बेचैनी इस हद तक कि पचहत्तर पार कर रहे इनके शीर्ष बुजुर्गों को युवाओं से सीधा संवाद करने की मजबूरी आन पड़ी है। कभी संकेतों में राजनीति करने वाला संघ अब अपने ही कहे का व्‍याख्‍याकार है। संघ प्रमुख आजकल जितना बोल रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। क्‍या बदले हुए समय और पीढ़ी के साथ यह महज तादात्‍म्‍य बैठाने की कवायद है या कुछ और? हालिया घटनाक्रम पर संघ के जानकार व्‍यालोक की टिप्‍पणी