ओडिशा : साल के जंगलों पर टिके वजूद को बचाने की जंग में आदिवासियों का सच्चा साथी कौन?
byवेदांता कंपनी को दिसंबर 2025 में सिजीमाली बॉक्साइट खनन परियोजना के पहले चरण की (सैद्धांतिक) मंजूरी मिली थी। वनों की कटाई को अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। फिर यहां साल के पेड़ कौन काट रहा है? सरकार, कंपनी या दलाल? आदिवासी इस सवाल से परेशान हैं, लेकिन उनके वजूद का संकट इतना गहरा चुका है वे नहीं जानते कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा में उनका सच्चा साथी कौन है। इसीलिए एमएमडीआर कानून में संशोधन के खिलाफ संयुक्त रैली निकाल चुके इंडिया गठबंधन को थोड़ा आगे बढ़कर सवालों का दायरा बढ़ाने की जरूरत है ताकि आदिवासियों की पुकार को उसमें जगह दी जा सके। रायगड़ा-कालाहांडी से रंजना पाढ़ी का फॉलो-अप