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Existential threat of AI

अगले दो से तीन साल में AI समूचे मीडिया को निगल जाएगा, मनुष्य को विस्थापित कर देगा!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पर चर्चा’ के दौरान विद्याथिर्यों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समझदारी भरे उपयोग का आग्रह करते हुए कहा है कि वे उस पर निर्भर न हों, बल्कि केवल दिशानिर्देश के लिए सहयोग लें। यह बात सुनने में जितनी अच्‍छी लगती है, उतनी ही सदिच्‍छा भरी है। AI जितनी तेजी से मानवीय उद्यमों की जगह छेकता जा रहा है, आने वाले दो से तीन साल में तकरीबन समूचे पारंपरिक मीडिया में वह मनुष्‍य की भूमिका का खत्‍म कर देगा। प्रोजेक्‍ट सिंडिकेट के AI संपादक चार्ल्‍स फर्गुसन ने AI कंपनियों के प्रमुखों से इस विषय में बात कर के एक चेतावनी भरा लेख लिखा है, जिसे पढ़ा जाना चाहिए

आवारा सर्वहारा

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आज जैसे हालात हैं, उनमें कह सकते हैं कि कामगार किसी कमतर ईश्वर के बनाए हुए नहीं हैं बल्कि उनको बनाने वाला ईश्वर ही अब वजूद से बाहर है। हक्सर इस लिहाज से श्रेय की पात्र हैं कि वे कामगारों को बचा ले जाने का एक सार्थक और सृजनात्मक प्रयास करती हैं, जो सामूहिक स्मृतिभ्रंश का त्रासद शिकार हो चुके हैं।