Ganga

Manikarnika in its original form, 2019

खंडित हुआ महादेव का त्रिशूल: काशी विध्‍वंस के नये अध्‍याय मणिकर्णिका पर भ्रम-खंडन

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पिछले दिनों बनारस के मणिकर्णिका घाट पर तोड़ी गई अहिल्‍याबाई होल्‍कर की प्रतिमा को लेकर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जो बवाल मचा, उसके बाद इस घटना को झूठा ठहराने के कई प्रयास हुए। जब संस्कृति बनाम विकास पर बहस उठी, तो इस क्रम में कुछ ऐसा लेखन सामने आया जिसमें पौराणिक और मिथकीय सूत्रों के हवाले से मणिकर्णिका घाट पर चल रही तोड़फोड़ को आधुनिक विकास के मुहावरे में उचित या स्‍वाभाविक ठहराया गया। ऐसी मिथकीय कुव्‍याख्‍याओं के भ्रमजाल को तोड़ते हुए काशी की संस्‍कृति और जन के हक में कुछ तथ्‍यात्‍मक बातें बता रहे हैं बनारस से वरिष्‍ठ पत्रकार अजय राय

A Boatman at Sangam

कुम्भ-2025: एक अपराधी की सरकारी प्रेरक-कथा में छुपी मल्लाहों की सामूहिक व्यथा

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कुम्‍भ के दौरान एक नाविक की पैंतालीस दिन में हुई तीस करोड़ रुपये की कमाई वाला यूपी के मुख्‍यमंत्री का असेंबली में दिया बयान इलाहाबाद के मल्‍लाहों के गले की फांस बन गया है। डेढ़ महीने के कुम्‍भ में बमुश्किल औसतन बीस-पचीस हजार रुपया कमा पाने वाले अधिसंख्‍य नाविक प्रशासन और ठेकेदारों के आपराधिक गठजोड़ तले दम तोड़ रहे हैं, जिसने नदी पर आश्रित समुदाय की आजीविका के सारे स्रोत ठेके पर उठा दिए हैं। कुम्‍भ के आयोजन के नाम पर इस बार जो कुछ भी हुआ है, पिंटू महारा उस मॉडल को समझने का प्रतीक है। संगम से सुशील मानव की फॉलो-अप रिपोर्ट

अकेले अकेले के खेल में: संगम पर दम तोड़ रहा है नाव, नदी और नाविक का रिश्ता

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इलाहाबाद के संगम पर इस साल केवल दो नावें बनी हैं। रोजी-रोटी की तलाश में नाविकों ने दूसरे सूबों का रुख कर लिया है। बनारस में गंगा पर क्रूज और वाटर टैक्‍सी चली, तो मल्‍लाहों ने क्रूज को घेर लिया, फिर नाव बांध दिए और हड़ताल पर चले गए। नदी, नाव और नाविक को अलग-अलग बांट कर देखने और बरतने वाले इस निजाम में हर नदी के किनारे गरीबी और वंचना की कहानियां बिखरी हुई हैं। इस सब के बीच नाव बनाने की कला ही लुप्‍त हो रही है। इलाहाबाद से गौरव गुलमोहर की लंबी कहानी