किताबी फासीवाद : अपने वैचारिक वारिसों के लिए बीसवीं सदी के फासिस्टों की नुस्खा-पर्ची कैसी होगी?
byजो नाज़ीवादी और फासीवादी ताकतें बीसवीं सदी में चले लोकतांत्रिक संघर्षों में खत्म हो गई मानी जा रही थीं, उनका इक्कीसवीं सदी में नई शक्ल में उभार यह सोचने को विवश करता है कि उनकी योजना क्या है और आने वाली दुनिया की सूरत कैसी होगी। प्रोजेक्ट सिंडिकेट के सौजन्य से प्रसिद्ध अर्थशास्त्री यानिस वारूफाकिस की एक कल्पना, जिसमें वे गिनवा रहे हैं कि आज के फासिस्टों के पूर्वज अगर किसी तिजोरी में कोई नुस्खा-पर्ची छोड़ गए रहे हों तो उस पर क्या-क्या लिखा होगा।