Niyamgiri

Anil Agrawal meeting with Odisha CM Mohan Majhi

तेरह साल बाद नियमगिरि: अनिल अग्रवाल का नया ‘भरोसा’ बनाम आदिवासियों की प्राचीन आस्था

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वेदांता कंपनी नियमगिरि के डोंगरिया कोंध आदिवासियों से एक बार मुंह की खा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के कारण ही 2013 में ग्राम सभाओं की जीत मुमकिन हुई थी जब लोगों ने अपने पहाड़ में बॉक्‍साइट खनन परियोजना को रोक दिया था। तेरह साल बीत गए, नियमगिरि अब भी सुलग रहा है। पहले आदिवासियों के लोकप्रिय नेता लदा सिकाका की गिरफ्तारी होती है, फिर वेदांता के मालिक ओडिशा के मुख्‍यमंत्री से मिलते हैं और उनमें अपना ‘भरोसा’ जताते हैं कि नवंबर तक सब ठीक हो जाएगा। क्‍या यह मुलाकात सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई ग्राम सभाओं के सामूहिक निर्णय से बड़ी है? आखिर ऐसा क्‍या बदल गया बीते वर्षों में? नियमगिरि पर रंजना पाढ़ी का फॉलो-अप

वेदांता के खिलाफ अब कालाहांडी में खुल रहा है मोर्चा, लेकिन अबकी सामने अदाणी भी है…

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नियमगिरि आंदोलन की कामयाबी के बाद माना गया था कि पूर्वी तट के आदिवासियों के पहाड़ खनन से बच जाएंगे। आज दस साल बाद ठीक उलटा हो रहा है। वेदांता को तो बॉक्‍साइट खदान मिली ही है, अदाणी भी दो खदानों के साथ मैदान में है। संघर्ष का नया मोर्चा खुल रहा है कालाहांडी जिले के सिजिमाली और खंडुआलमाली में, जो देश का सबसे गरीब इलाका है। पिछले हफ्ते हुई दो जनसुनवाइयों में आदिवासियों ने कंपनी का जैसा प्रतिरोध किया है वह प्रेरक है, लेकिन यह लड़ाई तिहरी है और चुनाव पास हैं। अभिषेक श्रीवास्‍तव की लंबी रिपोर्ट