Progressive Culture

Giving Birth in a Prison Cell by Malak Mattar

फ़लस्तीन: ध्वंस, निर्वासन, और उदासी के बीच जैतून-सी उपजी प्रतिरोध और उम्मीद की कला

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समूची दुनिया आज युद्ध के कगार पर खड़ी है, लेकिन फ़लस्‍तीन की जनता तो बीते आठ दशक से एक ऐसे मुसलसल युद्ध में मुब्तिला है जिसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है। इतने लंबे और व्‍यापक ध्‍वंस के बाद समाज सामान्‍यत: टूट जाते हैं, लेकिन फलस्‍तीन की संस्‍कृति जैतून की जड़ों की तरह पुख्‍ता है। उसे फिर से उग आने का इंतजार भर है। यहां के मशहूर कलाकारों और चित्रकारों की कृतियों में अभिव्‍यक्‍त उदासी और उम्‍मीद की एक झलक दिखा रहे हैं पंकज निगम

Manglesh Dabral (16 May 1948 – 9 December 2020)

मंगलेश डबराल के अभाव में बीते तीन साल और संस्कृति से जुड़े कुछ विलंबित लेकिन जरूरी सवाल

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वे ‘नुकीली चीजों’ की सांस्‍कृतिक काट जानते थे लेकिन उनका सारा संस्‍कृतिबोध धरा का धरा रह गया क्‍योंकि न तो उन्‍होंने पिता की टॉर्च जलायी न बाहर वालों ने आग मांगी। वे बस देखते रहे और रीत गए। शायद कभी कोई सुधी आलोचक मंगलेश जी के रचनाकर्म में छुपी उस चिड़िया को जिंदा तलाशने की कोशिश कर पाए, जिसका नाम संस्‍कृति है और जिसके बसने की जगह इस समाज की सामूहिक स्‍मृति है।