Ravana

AI Illustration showing society in transition

बुराई का व्याकरण : रावण को जलाने वाला समाज आज जॉम्‍बी कैसे पैदा कर रहा है!

by

दशहरे पर हमारा समाज सदियों से रावण को मारता आ रहा है। वह जानता है कि यह प्रतीकात्‍मक कर्मकांड है, इससे बुराई खत्‍म नहीं होती। इसमें कभी किसी को बहुत दिक्‍कत नहीं थी, बशर्ते बुराइयों ने अपना चोला और रंगढंग नहीं बदला होता। बीते दो दशक के दौरान हुए सूचना प्रौद्योगिकी और उपाभोक्‍तावाद के विस्‍फोट ने सामाजिक बुराइयों का चलन और चरित्र बुनियादी रूप से बदल डाला है। स्‍वतंत्र ढंग से सोचने, तर्क करने, और नैतिक जीवन जीने की गुंजाइशों को ही अब मारा जा रहा है। हर जगह, हर शक्‍ल, हर कहानी अब एक जैसी दिखने लगी है, गोया सामने जॉम्‍बी फिल्‍म चल रही हो। रावण भी हर बार खुद को जलता देख कर हंसता ही होगा! बुराइयां आखिर किसी संक्रामक महामारी की तरह क्‍यों और कैसे फैल रही हैं, इस पर अमरपाल सिंह वर्मा ने विस्‍तार से विचार किया है। विजयादशमी पर विशेष प्रस्‍तुति