Surveillance State

AI Illustration showing society in transition

बुराई का व्याकरण : रावण को जलाने वाला समाज आज जॉम्‍बी कैसे पैदा कर रहा है!

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दशहरे पर हमारा समाज सदियों से रावण को मारता आ रहा है। वह जानता है कि यह प्रतीकात्‍मक कर्मकांड है, इससे बुराई खत्‍म नहीं होती। इसमें कभी किसी को बहुत दिक्‍कत नहीं थी, बशर्ते बुराइयों ने अपना चोला और रंगढंग नहीं बदला होता। बीते दो दशक के दौरान हुए सूचना प्रौद्योगिकी और उपाभोक्‍तावाद के विस्‍फोट ने सामाजिक बुराइयों का चलन और चरित्र बुनियादी रूप से बदल डाला है। स्‍वतंत्र ढंग से सोचने, तर्क करने, और नैतिक जीवन जीने की गुंजाइशों को ही अब मारा जा रहा है। हर जगह, हर शक्‍ल, हर कहानी अब एक जैसी दिखने लगी है, गोया सामने जॉम्‍बी फिल्‍म चल रही हो। रावण भी हर बार खुद को जलता देख कर हंसता ही होगा! बुराइयां आखिर किसी संक्रामक महामारी की तरह क्‍यों और कैसे फैल रही हैं, इस पर अमरपाल सिंह वर्मा ने विस्‍तार से विचार किया है। विजयादशमी पर विशेष प्रस्‍तुति

Eknath Shinde, Maharashta CM

महाराष्ट्र का नया कानून और ‘पुलिस राज’ का कसता शिकंजा

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भारत में 1 जुलाई से लागू हुई नई न्‍याय संहिताओं के साथ-साथ महाराष्‍ट्र में एक नया जनसुरक्षा कानून भी आया है। यह कानून उस ‘शहरी नक्‍सल’ के खतरे पर अंकुश के लिए बनाया गया है, जिसके बारे में इस देश का गृह राज्‍यमंत्री संसद में कह चुका है कि गृह मंत्रालय और सरकार की आधिकारिक शब्‍दावली में यह शब्‍द है ही नहीं। ऐसे अनधिकारिक और अपरिभाषित शब्‍दों के नाम पर बनाए जा रहे कानून और की जा रही कार्रवाइयों के मकसद और मंशा पर नजर डाल रहे हैं सुभाष गाताडे

आंकड़ों का राष्ट्रवाद: डेटा सुरक्षा और निजता की चिंताओं के बीच गांधी के सबक

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संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संक्षिप्‍त संबोधन में कैबिनेट से पारित हो चुके डेटा प्रोटेक्‍शन बिल 2023 का नाम लिया, जिसे इस सत्र में सदन के पटल पर रखा जाना है। ऐसा लगता है कि सरकार नागरिकों के डेटा और निजता को लेकर काफी संवेदनशील है, लेकिन कहानी ठीक उलटी है। ऐसे ही एक बिल डीएनए प्रौद्योगिकी विनियमन विधेयक, 2019 को इस सत्र में वापस लेने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। डेटा, राष्‍ट्रवाद, नागरिकों की जासूसी और निजता के रिश्‍तों को विस्तार से समझा रहे हैं डॉ. गोपाल कृष्‍ण