भारत का पत्रकार मानवाधिकार कार्यकर्ता कैसे बना?
byइस प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर युनेस्को की थीम में एक अदृश्य सबक छुपा है, कि अब समुदाय, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता के बीच अंतर बरतने का वक्त जा चुका
इस प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर युनेस्को की थीम में एक अदृश्य सबक छुपा है, कि अब समुदाय, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता के बीच अंतर बरतने का वक्त जा चुका
जिन एप्लाइड मैथमेटीशियन को मैथ वाले कमतर मानते थे और कहा करते थे कि यह भी कोई मैथ जानते हैं जी! उनकी आज दुनिया भर में पूछ हो रही है. हर तरफ मैथेमेटिकल मॉडलिंग का शोर है. दुनिया विश्वयुद्ध के बाद पहली बार इस तरह से गणित के सामने दण्डवत हुई है.
पहचान की राजनीति यह मानकर चलती है कि हम सभी की जितनी पहचानें हैं, उनमें से सिर्फ एक पहचान ही हमारी राजनीति को तय करती है