Communism

100 Years of CPI

भारत में कम्युनिस्ट पार्टी के सौ साल : शहादतों, योगदानों और संघर्षों का एक सरल सफरनामा

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सौ साल पहले यह प्रयोग रहा होगा, लेकिन आज संयोग लगता है कि भारत सरकार को चलाने वाली राजनैतिक पार्टी की मातृसंस्‍था आरएसएस और उसकी राजनीति की सतत विरोधी रही कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के सौ साल एक साथ 2025 में पूरे हुए हैं। एक सदी के दौरान कई धड़ों और धाराओं में बंट चुकी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी आज भले अपने अवसान पर दिखती है, लेकिन इस समाज को दिए उसके योगदानों और शहादतों की दास्‍तान बहुत लंबी और बड़ी है, जिससे युवा पीढ़ी अधिकांशत: अनजान है। भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की स्‍थापना के सौ वर्ष पूरे होने पर ट्राइकॉन्टिनेंटल सामाजिक शोध संस्‍थान के कई डोजियर से तैयार की हुई एक सरल कहानी को फॉलो-अप स्‍टोरीज़ साभार अपने पाठकों के लिए प्रस्‍तुत कर रहा है।

मिलान कुंदेरा के बहाने: प्राग और मॉस्को के दो विरोधी ध्रुव

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अपनी रचनाओं में कम्‍युनिस्‍ट सर्वसत्‍तावाद की आलोचना करने वाले चेक-फ्रेंच लेखक मिलान कुन्‍देरा 11 जुलाई को चल बसे। कभी वे कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के सदस्‍य हुआ करते थे। उन्‍हें पार्टी से निकाला गया था। वे 1975 में पेरिस चले आए और वहीं के नागरिक हो गए। उनके पीछे जो रह गए, जिन्‍होंने कम्‍युनिस्‍ट आतंक के साये तले देश नहीं छोड़ा बल्कि वे लड़े और सब सहे, उनकी कहानियां कम ज्ञात हैं