Journalism

Saumya Raj

NDLS, 15/02 : खबर मिटाने पर आमादा रेलवे पुलिस के सामने अडिग रही एक रिपोर्टर की डायरी

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आधी रात हुई दर्जनों मौतों की गवाहियां सुन-सुन के, दर्ज कर-कर के, थक चुके एक रिपोर्टर को अगर तकरीबन बंधक बनाकर कहा जाय कि उसे अपना सारा काम उड़ाना होगा वरना थाने जाना होगा, तो उसके सामने क्‍या विकल्‍प बचता है? सौम्‍या राज के साथ पंद्रह फरवरी को नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर यही हुआ, लेकिन उन्‍होंने पुलिस के सामने हथियार नहीं डाले। सत्‍ता के प्रतिकूल खबरों को खुलेआम दबाए जाने के दौर में पेशेवर साहस की एक छोटी-सी पर अहम मिसाल, कुछ जरूरी सवालों के साथ। खुद रिपोर्टर की कलम से

यूपी में खबरनवीसी: सच लिखने का डर और प्रिय बोलने का दबाव 2023 में राजाज्ञा बन गया

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उत्‍तर प्रदेश में पत्रकारिता पहले से ही कठिन थी। अब लगभग असंभव सी हो गई है। बीते एक साल के दौरान ‘नकारात्‍मक’ खबरें न लिखने के सरकारी फरमान के बाद पत्रकारों के ऊपर जम कर मुकदमे हुए हैं। छोटे गांव-कस्‍बों में दबंगों और माफिया का आतंक अलग से है। विडम्‍बना यह है कि रामराज्‍य लाने की तैयारियों में व्‍यस्‍त मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रामनाथ गोयनका के चरणों में फूल अर्पित कर के सच को पाबंद करने का काम किया है। लखनऊ से असद रिज़वी की रिपोर्ट

भारत का पत्रकार मानवाधिकार कार्यकर्ता कैसे बना?

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इस प्रेस स्‍वतंत्रता दिवस पर युनेस्‍को की थीम में एक अदृश्‍य सबक छुपा है, कि अब समुदाय, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता के बीच अंतर बरतने का वक्‍त जा चुका