Obituary

Gargi Chakraborty

हम दिल्ली में उनकी बाट जोहते रहे, वे कोलकाता से ही कॉमरेड सुमित के पास चली गईं…

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प्रतिष्ठित इतिहासकार, महिला और कम्‍युनिस्‍ट आंदोलन की महत्‍वपूर्ण आवाज डॉ. गार्गी चटर्जी बीते 2 मार्च को नहीं रहीं। उनका 78 वर्ष की उम्र में कोलकाता में निधन हो गया। अभी साल भर भी नहीं हुआ उनके जीवनसाथी सुमित चक्रवर्ती को गुजरे हुए जो साप्‍ताहिक पत्रिका मेनस्‍ट्रीम के संपादक हुआ करते थे और देश के बौद्धिक समाज के भीतर बचे-खुचे चुनिंदा नैतिक स्‍वरों में एक थे। सुमित चक्रवर्ती और गार्गी चक्रवर्ती के साथ अपनी मुलाकातों, संस्‍मरणों और प्रसंगों पर श्रद्धांजलि-स्‍वरूप विनीत तिवारी की टिप्‍पणी

Ngugi wa Thiong'o

न्गुगी वा थ्योंगो : जिन्हें नोबेल मिलना भारत की मुक्तिकामी आवाजों को शायद बचा ले जाता!

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महान अफ्रीकी लेखक और मुक्तिकामी राजनीति के हस्‍ताक्षर न्गुगी वा थ्योंगो का 28 मई को निधन हो गया। वैश्विक स्‍तर पर उनके निधन की ठीकठाक चर्चा हुई है लेकिन भारत में और खासकर हिंदी जगत में एक परिचित किस्‍म का सन्नाटा है- बावजूद इसके कि न्‍गुगी पहली बार 1996 में और दूसरी बार 2018 में न सिर्फ भारत आए, बल्कि बीते तीन दशक में उनके लिखे साहित्‍य का हिंदी में विपुल अनुवाद भी हुआ। भारत की राजनीति और समाज से जबरदस्‍त समानताएं होने के बावजूद अफ्रीकी जनता के नवउदारवाद-विरोधी संघर्ष को हिंदी के व्‍यापक पाठक समाज ने यदि तवज्‍जो नहीं दी, तो क्या उसकी वजह न्‍गुगी को नोबेल न मिल पाना है? अगर उन्‍हें नोबेल मिल जाता, तब क्‍या तस्‍वीर कुछ और होती? न्‍गुगी की दूसरी भारत यात्रा के संस्‍मरणों को टटोलते हुए इस काल्‍पनिक सवाल के बहाने अभिषेक श्रीवास्‍तव का स्‍मृति-लेख

Fredric Jameson

फ्रेडरिक जेमसन: पुरानी दुनिया और नए युग के वैचारिक जगत को जोड़ने वाला अंतिम सिरा

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आज से बीसेक दिन पहले फ्रेडरिक जेमसन शायद इकलौते जीवित शख्‍स थे जिन्‍होंने एक सदी के दौरान बदलती हुई हमारी दुनिया को न सिर्फ देखा और महसूस किया था, बल्कि राजनीति, वैचारिकी, संस्‍कृति से लेकर बौद्धिकता के विभिन्‍न क्षेत्रों में हुए बदलावों की सघन पड़ताल करते हुए विपुल लेखन भी किया। वे पुरानी और नई दुनिया के बीच एक वैचारिक पुल थे, जो बीते 22 सितंबर को चल बसे। इस दुनिया को दिए उनके वैचारिक योगदान के आईने में प्रतिष्ठित दार्शनिक स्‍लावोइ ज़ीज़ेक ने उन्‍हें याद किया है। ज़ीज़ेक का जेमसन पर लिखा स्‍मृतिलेख यहां अविकल प्रस्‍तुत है

यूपीए या एनडीए? गदर ने कहा था- हिरन से पूछो, शेर अच्छा या चीता!

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गुम्‍माडि विट्ठल राव उर्फ ‘गदर’ जिंदगी भर घूम-घूम कर जनता को अपने गीतों से सत्‍ताओं के खिलाफ जगाते रहे। तेलंगाना राज्‍य बन जाने के बाद उन्‍होंने केसीआर द्वारा जमीनों की लूट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तीन महीने पहले तक वे सरकार के खिलाफ पदयात्रा कर रहे थे। अचानक 6 अगस्‍त को हुई मौत के बाद उन्‍हें राजकीय सम्‍मान दे दिया गया। जनता के एक और नायक को जीते जी नहीं, तो मरने के बाद सत्‍ता ने अपनी चादर में समेट लिया। 2006 में गदर के साथ हुई मुलाकात के बहाने उन्‍हें याद कर रहे हैं अभिषेक श्रीवास्‍तव

श्रद्धांजलि: शीतला जी ने मिशन और सेकुलर पत्रकारिता का उच्च मापदंड स्थापित किया

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अयोध्या से निकलने वाले सहकारी अखबार ‘जनमोर्चा’ के संस्थापक और प्रधान संपादक शीतला सिंह के निधन पर उन्हें याद कर रहे हैं ‘ब्लिट्ज’ से जुड़े रहे लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कपूर