Rightwing Politics

A Gen-Z protestor at Jantar Mantar, 24 July 2026 (Abhishek Srivastava/FUS)

क्‍या लोकतंत्र में तानाशाही को संवैधानिक रूप से बैन किया जा सकता है? एक जरूरी सबक

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क्‍या लोकतंत्र में एक अलोकतांत्रिक दल पर प्रतिबंध की कार्रवाई करना अलोकतांत्रिक है? यह दुविधा कम से कम सौ साल पुरानी है, लेकिन इसे हल करने की मिसाल 1950 के दशक के जर्मनी में मौजूद है। जब लोकतंत्र को निगल जाने वाली तानाशाही ताकत चुनावी रास्‍ते से सत्ता में आ जाए, तो संविधान और अदालतें बहुत कुछ ऐसा कर सकती हैं जिससे लोकतंत्र में स्‍वस्‍थ राजनीतिक प्रतिस्‍पर्धा की बहाली हो सके। प्रिंस्‍टन में राजनीतिशास्‍त्र के प्रोफेसर यान-वर्नर म्‍यूलर की प्रासंगिक टिप्‍पणी, प्रोजेक्‍ट सिंडिकेट के सौजन्‍य से

भारत का ‘लेफ्ट’ और एजाज़ अहमद की तकलीफ

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बीते 89 वर्ष में आरएसएस ने आखिर ऐसी कौन सी रणनीति अपनाई कि उसके राजनीतिक मोर्चे भाजपा ने 2014 में भारत की केन्द्रीय सत्ता पर कब्‍जा कर लिया? जबकि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी जिसकी विधिवत स्थापना आरएसएस के साथ ही 1925 में हुई थी और आजादी के बाद जो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी, अपने दो प्रदेश भी गंवा बैठी? ऐसा कैसे मुमकिन हुआ? इतिहासकार एजाज़ अहमद और एंतोनियो ग्राम्‍शी से सबक लेते हुए इस प्रासंगिक सवाल पर रोशनी डाल रहे हैं मुशर्रफ़ अली