राम सिंह जाखड़: राजनीतिक बंदियों की काल कोठरी में अतीत से आती उम्मीद की रोशनी
byपिछले साल की शुरुआत में भारत की जेलों में कैद लोगों की संख्या पांच लाख को पार कर गई थी। इनमें 75 प्रतिशत ऐसे बंदी थे जिनके मुकदमों की सुनवाई भी शुरू नहीं हुई थी। इन्हीं में सैकड़ों राजनीतिक कैदी भी हैं, जिन्हें भारत सरकार अलग से कोई श्रेणी नहीं मानती। इनकी संख्या बीते दो-तीन वर्षों में तेजी से बढ़ी है। भीमा-कोरेगांव के दर्जन भर बंदियों से लेकर उमर खालिद, सोनम वांग्चुक ऐसे कुछ परिचित नाम हैं। आजादी से पहले राजनीतिक बंदी रहे 22 फरवरी, 1916 को जन्मे छात्र नेता राम सिंह जाखड़ का जेल वृत्तान्त इन बंदियों के लिए एक प्रेरक गाथा है। आर्काइव के कोनों से निकली कहानी सुना रहे हैं अखिलेश यादव