Far-Right Regimes

A Gen-Z protestor at Jantar Mantar, 24 July 2026 (Abhishek Srivastava/FUS)

क्‍या लोकतंत्र में तानाशाही को संवैधानिक रूप से बैन किया जा सकता है? एक जरूरी सबक

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क्‍या लोकतंत्र में एक अलोकतांत्रिक दल पर प्रतिबंध की कार्रवाई करना अलोकतांत्रिक है? यह दुविधा कम से कम सौ साल पुरानी है, लेकिन इसे हल करने की मिसाल 1950 के दशक के जर्मनी में मौजूद है। जब लोकतंत्र को निगल जाने वाली तानाशाही ताकत चुनावी रास्‍ते से सत्ता में आ जाए, तो संविधान और अदालतें बहुत कुछ ऐसा कर सकती हैं जिससे लोकतंत्र में स्‍वस्‍थ राजनीतिक प्रतिस्‍पर्धा की बहाली हो सके। प्रिंस्‍टन में राजनीतिशास्‍त्र के प्रोफेसर यान-वर्नर म्‍यूलर की प्रासंगिक टिप्‍पणी, प्रोजेक्‍ट सिंडिकेट के सौजन्‍य से

Marine Le Pen

यूरोप चुनाव: बढ़ते मसखरों के बीच नए फासिस्‍टों का मंडराता साया

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इस महीने यूरोपीय संसद के लिए हुए चुनावों के बाद अब मुख्‍यधारा के राजनीतिक दल और नेता धुर दक्षिणपंथ के साथ एक नाव में सवार होने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। इस तरह, दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद यूरोप के लोकतांत्रिक देशों द्वारा ‘फासिस्‍टों से गठजोड़ न करने’ के अपनाए गए सिद्धांत को चुपके से तिलांजलि दे दी गई है। अब यूरोप को फासिस्‍ट कुबूल हैं। प्रोजेक्‍ट सिंडिकेट के साथ फॉलो-अप स्‍टोरीज की विशेष व्‍यवस्‍था के तहत प्रतिष्ठित चिंतक स्‍लावोइ ज़ीज़ेक का विश्‍लेषण

Hitler fiddling with globe, a scene from The Great Dictator

क्या 2024 पूरी दुनिया में ‘कब्जे का वर्ष’ है? क्या 1933 खुद को दोहरा रहा है?

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1933 में अडॉल्‍फ हिटलर की सत्‍ता का उदय आज 2024 में कहीं ज्‍यादा प्रासंगिक हो चुका है। दुनिया का ज्‍यादातर हिस्‍सा इस साल निर्णायक चुनावों में जा रहा है। दुनिया की आधी आबादी अपनी किस्‍मत का फैसला अपने वोट से करने जा रही है। चेतावनी के संकेत यहां-वहां बिखरे पड़े हैं, लेकिन कुछ जानकार खुलकर अब कह रहे हैं कि लिबरल जनतंत्र चुनावी दांव पर लग चुका है। इतिहासकार मार्क जोन्‍स की महत्‍वपूर्ण टिप्‍पणी