Media

Existential threat of AI

अगले दो से तीन साल में AI समूचे मीडिया को निगल जाएगा, मनुष्य को विस्थापित कर देगा!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पर चर्चा’ के दौरान विद्याथिर्यों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समझदारी भरे उपयोग का आग्रह करते हुए कहा है कि वे उस पर निर्भर न हों, बल्कि केवल दिशानिर्देश के लिए सहयोग लें। यह बात सुनने में जितनी अच्‍छी लगती है, उतनी ही सदिच्‍छा भरी है। AI जितनी तेजी से मानवीय उद्यमों की जगह छेकता जा रहा है, आने वाले दो से तीन साल में तकरीबन समूचे पारंपरिक मीडिया में वह मनुष्‍य की भूमिका का खत्‍म कर देगा। प्रोजेक्‍ट सिंडिकेट के AI संपादक चार्ल्‍स फर्गुसन ने AI कंपनियों के प्रमुखों से इस विषय में बात कर के एक चेतावनी भरा लेख लिखा है, जिसे पढ़ा जाना चाहिए

Illustration/Perplexity AI

भारत के नए आय कर कानून से स्वतंत्र पत्रकार और डिजिटल क्रिएटर क्यों डरे हुए हैं?

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भारत की संसद ने 12 अगस्‍त को आय कर कानून, 2025 पारित किया था। इसके बाद मीडिया में यह चर्चा जोर पकड़ने लगी कि टैक्‍स अधिकारी अब अपने विस्‍तारित अधिकारों का दुरुपयोग कर के कहीं पत्रकारों के स्रोतों को उजागर न करने लगें, उनकी निगरानी न करने लग जाएं और वित्तीय अपराधों के आरोपों से उन्‍हें निशाना न बनाने लग जाएं। इस संदर्भ में कमेटी टु प्रोटेक्‍ट जर्नलिस्‍ट्स (सीपीजे) की सोमी दास ने सरकार की मीडिया पर बढ़ती हुई निगरानी और नए कर कानून के निहितार्थों पर इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के अपार गुप्‍ता से बात की है।

Saumya Raj

NDLS, 15/02 : खबर मिटाने पर आमादा रेलवे पुलिस के सामने अडिग रही एक रिपोर्टर की डायरी

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आधी रात हुई दर्जनों मौतों की गवाहियां सुन-सुन के, दर्ज कर-कर के, थक चुके एक रिपोर्टर को अगर तकरीबन बंधक बनाकर कहा जाय कि उसे अपना सारा काम उड़ाना होगा वरना थाने जाना होगा, तो उसके सामने क्‍या विकल्‍प बचता है? सौम्‍या राज के साथ पंद्रह फरवरी को नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर यही हुआ, लेकिन उन्‍होंने पुलिस के सामने हथियार नहीं डाले। सत्‍ता के प्रतिकूल खबरों को खुलेआम दबाए जाने के दौर में पेशेवर साहस की एक छोटी-सी पर अहम मिसाल, कुछ जरूरी सवालों के साथ। खुद रिपोर्टर की कलम से

यूपी में खबरनवीसी: सच लिखने का डर और प्रिय बोलने का दबाव 2023 में राजाज्ञा बन गया

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उत्‍तर प्रदेश में पत्रकारिता पहले से ही कठिन थी। अब लगभग असंभव सी हो गई है। बीते एक साल के दौरान ‘नकारात्‍मक’ खबरें न लिखने के सरकारी फरमान के बाद पत्रकारों के ऊपर जम कर मुकदमे हुए हैं। छोटे गांव-कस्‍बों में दबंगों और माफिया का आतंक अलग से है। विडम्‍बना यह है कि रामराज्‍य लाने की तैयारियों में व्‍यस्‍त मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने रामनाथ गोयनका के चरणों में फूल अर्पित कर के सच को पाबंद करने का काम किया है। लखनऊ से असद रिज़वी की रिपोर्ट