Capitalism

नए दौर के नकली नायक: डॉ. रघुराम राजन

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हर दुनिया में और हर दौर में कुछ ऐसे नायक पैदा होते हैं जो नकली होते हैं। इनका पता समय रहते नहीं लगता। समय बीत जाने के बाद इनकी गांठें खुलती हैं। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। कोरोना महामारी के बाद आज जो नई दुनिया हम अपनी आंखों के आगे बनती देख रहे हैं, उसने भी कुछ नए नायक पैदा किए हैं। ये नायक एकबारगी जनता की बात करते दिखते हैं, लेकिन उनकी प्रेरणाएं और मंशाएं अपने कहे से उलट होती हैं। ऐसे ही व्यक्तियों के ऊपर नए साल में हम ‘नए दौर के नकली नायक’ नाम से एक श्रृंखला शुरू कर रहे हैं। पहली कड़ी मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. रघुराम राजन के ऊपर मुशर्रफ अली की कलम से

नोटबंदी 2.0 : काला धन वापस आएगा, लेकिन सफेद हो कर!

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बैंकों की हालत फिर खस्ता हो चुकी है। इसको बचाने के लिए सरकार द्वारा बैंकों का आपसी विलय करना भी काम नहीं आया क्योंकि उद्योगपतियों ने नोटबंदी के बाद लिए गए कर्ज की वापसी की ही नहीं, जो कि उनकी फितरत है

पूंजीवाद की मौत करीब है

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पूंजीवादी व्यवस्था का पतन अब बहुत निकट आ चला है। जितना आप और हम सोच रहे हैं उससे कहीं निकट। केवल एक बात है जो हम नहीं जानते। वह है ट्रिगर इवेंट। वह द्विपक्षीय तनाव भी हो सकता है जिसकी पर्याप्त सम्भावनाएं भारत-पाक, भारत-चीन, चीन-अमरीका, अमरीका-रूस के  बीच देखी जा सकती हैं। वह ब्रेगज़िट या कोई अन्य घटना से भी हो सकता है। लेकिन यह निश्चित हो चला है कि‍ अब इसे टाला नहीं जा सकता।