Death

A Baiga tribal with her infant in the government hospital, Balaghat

बालाघाट: ‘नक्सलमुक्त’ जिले में मलेरिया से मर रहे कुपोषित बच्चों का जिम्मेदार कौन?

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बालाघाट के वनांचल में रहने वाले आदिवासियों को दशकों के ‘लाल आतंक’ से पिछले साल मुक्ति मिली ही थी कि उनके शरीर पर किसी अभिशाप की तरह लाल चकत्ते उभरना शुरू हो गए। शुरू में तो उन्‍होंने भी इसे दैवीय प्रकोप ही माना, फिर बुखार चढ़ा तो पहले से कुपोषित शरीर ने चिकित्‍सा सेवाओं के अभाव में जवाब देना शुरू कर दिया। जून में पहले बच्‍चे की मौत हुई। आज बच्‍चों की मौत का आंकड़ा दो दर्जन के पार जा चुका है। राज्‍य को नक्‍सलमुक्‍त घोषित कर के अपनी पीठ थप‍थपा चुकी सरकार मलेरिया से हलकान है। विरोध में आदिवासियों ने जिला बंद का आह्वान कर डाला है। बालाघाट से नितेश उचबगले की रिपोर्ट

Kailash Vijayvargiya

इंदौर : दो दर्जन मौतों के बाद वह इस्तीफा, जिसका इंतजार तो सबको था पर अब तक हुआ नहीं

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कैलाश विजयवर्गीय ने कभी कहा था कि संघ ही देश को बचा सकता है। जाहिर है, फिर संघ ऐसा कहने वाले को क्‍यों न बचाता? खासकर तब, जब उस शख्‍स की ऐसी तूती बोलती है कि खुद कांग्रेस के नेता भी उसी के भरोसे राजनीति करते हैं। नतीजा, कलक्‍टर तक संघ के दफ्तर तलब कर लिए गए। इंदौर के भागीरथपुरा में जब दो दर्जन लोग गंदा पानी पीकर मरे और अभूतपूर्व ढंग से एक स्‍वर में कैलाश की गरदन मांगी गई, तो इस मांग का मजाक बनना तय था। पूरी कहानी सुना रहे हैं इंदौर से लौटकर अमन गुप्‍ता

Speckled Cobra in a field near an agricultural worker, WHO

MP : तांत्रिक हो या अफसर, यहां सबके लिए है सांप के जहर में अवसर सिवाय मरने वाले के…

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कभी सपेरों का देश कहे जाने वाले भारत में सांप के काटे से मरने वालों की संख्‍या पूरी दुनिया में सर्पदंश से होने वाली मौतों की आधी से ज्‍यादा है। अस्‍पतालों का टोटा, अंधविश्‍वास की व्‍याप्ति और विलुप्‍त होते देसी उपचारक समस्‍या को और गहरा कर रहे हैं। जहररोधी उपलब्‍ध करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सरकार के निर्देश, और बीते सात साल से हर 19 सितंबर को मनाए जा रहे अंतरराष्‍ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस का कोई असर नहीं पड़ रहा है। उलटे, सांप भी अब भ्रष्‍टाचार की चपेट में आ गए हैं। अपनी तरह का मौलिक सांप घोटाला देखने वाले मध्‍य प्रदेश के सागर से सतीश भारतीय की रिपोर्ट

छतरपुर के पलटा गांव में खनन के दौरान मारे गए टिंकू रेकवार का शोकाकुल परिवार

बुंदेलखंड: अवैध खनन, गुमनाम मौतें और एक अदद तहरीर का इंतजार

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पुलिस नहीं चाहती कि उसके पास मरे हुए लोगों की एफआइआर हो। ठेकेदार और खदान मालिकान भी नहीं चाहते कि कानूनी पचड़े में उनका व्‍यापार फंसे। इसलिए इनके बीच एक अघोषित समझौता है कि उनकी लापरवाही से कोई मजदूर मर जाए तो उसके परिवार का मुंह पैसे से बंद करा दो। कोई बोले तो उसे गायब करवा दो, मरवा दो। मध्‍य प्रदेश के बुंदेलखंड की खदानों में लगातार अनाम मौत मर रहे मजदूरों पर सतीश मालवीय की जमीनी पड़ताल