Kalahandi

Tribal women and Sal trees in Kalahandi

ओडिशा : साल के जंगलों पर टिके वजूद को बचाने की जंग में आदिवासियों का सच्चा साथी कौन?

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वेदांता कंपनी को दिसंबर 2025 में सिजीमाली बॉक्‍साइट खनन परियोजना के पहले चरण की (सैद्धांतिक) मंजूरी मिली थी। वनों की कटाई को अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। फिर यहां साल के पेड़ कौन काट रहा है? सरकार, कंपनी या दलाल? आदिवासी इस सवाल से परेशान हैं, लेकिन उनके वजूद का संकट इतना गहरा चुका है वे नहीं जानते कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा में उनका सच्‍चा साथी कौन है। इसीलिए एमएमडीआर कानून में संशोधन के खिलाफ संयुक्‍त रैली निकाल चुके इंडिया गठबंधन को थोड़ा आगे बढ़कर सवालों का दायरा बढ़ाने की जरूरत है ताकि आदिवासियों की पुकार को उसमें जगह दी जा सके। रायगड़ा-कालाहांडी से रंजना पाढ़ी का फॉलो-अप

Anil Agrawal meeting with Odisha CM Mohan Majhi

तेरह साल बाद नियमगिरि: अनिल अग्रवाल का नया ‘भरोसा’ बनाम आदिवासियों की प्राचीन आस्था

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वेदांता कंपनी नियमगिरि के डोंगरिया कोंध आदिवासियों से एक बार मुंह की खा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के कारण ही 2013 में ग्राम सभाओं की जीत मुमकिन हुई थी जब लोगों ने अपने पहाड़ में बॉक्‍साइट खनन परियोजना को रोक दिया था। तेरह साल बीत गए, नियमगिरि अब भी सुलग रहा है। पहले आदिवासियों के लोकप्रिय नेता लदा सिकाका की गिरफ्तारी होती है, फिर वेदांता के मालिक ओडिशा के मुख्‍यमंत्री से मिलते हैं और उनमें अपना ‘भरोसा’ जताते हैं कि नवंबर तक सब ठीक हो जाएगा। क्‍या यह मुलाकात सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई ग्राम सभाओं के सामूहिक निर्णय से बड़ी है? आखिर ऐसा क्‍या बदल गया बीते वर्षों में? नियमगिरि पर रंजना पाढ़ी का फॉलो-अप

Kalahandi Police and Vedanta

सिजिमाली से आगे: पूर्वी घाटों में वेदांता-अदाणी की घेराबंदी के बीच आदिवासियों का संघर्ष जारी

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मार्च के अंत में हमने ओडिशा के माली पर्वतों पर बॉक्‍साइट खनन और उसके खिलाफ चल रहे आदिवासियों के संघर्ष का हाल दिया था, तब तक यह ख़बर राष्‍ट्रीय सुर्खियों में नहीं आई थी। ठीक हफ्ते भर बाद 6-7 अप्रैल की दरमियानी रात कंटामाल गांव में जो पुलिसिया कहर बरपा, उसने अदाणी, वेदांता और ओडिशा की सरकार के बीच मुनाफे के गठजोड़ को अचानक खोल दिया। चौतरफा प्रदर्शन हुए और अब तक घने जंगलों में छुपे रायगड़ा और कालाहांडी के भीतर चल रही कॉरपोरेट साजिशें दुनिया के सामने खुल गईं। अप्रैल से लेकर अब तक उस इलाके में चले घटनाक्रम पर सिद्धार्थ कार और रंजना पाढ़ी द्वारा भेजा फॉलो-अप

Womens March in Sijimali

तिजिमाली: पूरा इलाका बना रणक्षेत्र, एक वक्त खाना खाकर वेदांता के खिलाफ डटे हैं आदिवासी

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अक्‍टूबर, 2023 में हमने पहली बार कालाहांडी के सिजिमाली और खंडुआलमाली गांवों से वेदांता और अदाणी के खिलाफ खुल रहे आंदोलन के एक मोर्चे को यहां रिपोर्ट किया था। ढाई साल के भीतर इलाके में आग लग चुकी है। पूरा इलाका छावनी बना हुआ है। मनमानी गिरफ्तारियां जारी हैं। फर्जी मुकदमे लादे जा रहे हैं और आदिवासियों का घर से निकलना मुहाल हो चुका है। रंजना पाढ़ी और रैन्‍डल सेक्‍वेरा के भेजे अपडेट के आधार पर खनन प्रभावित गांवों के एकदम ताजा हाल पर फॉलो अप

वेदांता के खिलाफ अब कालाहांडी में खुल रहा है मोर्चा, लेकिन अबकी सामने अदाणी भी है…

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नियमगिरि आंदोलन की कामयाबी के बाद माना गया था कि पूर्वी तट के आदिवासियों के पहाड़ खनन से बच जाएंगे। आज दस साल बाद ठीक उलटा हो रहा है। वेदांता को तो बॉक्‍साइट खदान मिली ही है, अदाणी भी दो खदानों के साथ मैदान में है। संघर्ष का नया मोर्चा खुल रहा है कालाहांडी जिले के सिजिमाली और खंडुआलमाली में, जो देश का सबसे गरीब इलाका है। पिछले हफ्ते हुई दो जनसुनवाइयों में आदिवासियों ने कंपनी का जैसा प्रतिरोध किया है वह प्रेरक है, लेकिन यह लड़ाई तिहरी है और चुनाव पास हैं। अभिषेक श्रीवास्‍तव की लंबी रिपोर्ट