सिजिमाली से आगे: पूर्वी घाटों में वेदांता-अदाणी की घेराबंदी के बीच आदिवासियों का संघर्ष जारी

Kalahandi Police and Vedanta
Kalahandi Police and Vedanta
मार्च के अंत में हमने ओडिशा के माली पर्वतों पर बॉक्‍साइट खनन और उसके खिलाफ चल रहे आदिवासियों के संघर्ष का हाल दिया था, तब तक यह ख़बर राष्‍ट्रीय सुर्खियों में नहीं आई थी। ठीक हफ्ते भर बाद 6-7 अप्रैल की दरमियानी रात कंटामाल गांव में जो पुलिसिया कहर बरपा, उसने अदाणी, वेदांता और ओडिशा की सरकार के बीच मुनाफे के गठजोड़ को अचानक खोल दिया। चौतरफा प्रदर्शन हुए और अब तक घने जंगलों में छुपे रायगड़ा और कालाहांडी के भीतर चल रही कॉरपोरेट साजिशें दुनिया के सामने खुल गईं। अप्रैल से लेकर अब तक उस इलाके में चले घटनाक्रम पर सिद्धार्थ कार और रंजना पाढ़ी द्वारा भेजा फॉलो-अप

अप्रैल की शुरुआत में कंटामाल गांव के ऊपर क्रूर पुलिस कार्रवाई ने सिजिमाली में खनन विरोधी आंदोलन की ओर राष्ट्रीय स्‍तर पर ध्यान आकर्षित किया था। देश के हर कोने से एकजुटता के जो स्‍वर आए, सरकार पर उसका कोई असर नहीं पड़ा, बल्कि ज्‍यादा खतरनाक यह हुआ कि सरकार ने बिना विचलित हुए और खनन परियोजनाओं की ओर अपने कदम बढा दिए।

आज कुटरूमाली और कोडिंगामाली के लिए जनसुनवाई की घोषणा हो चुकी है, लेकिन पूर्वी घाटों में ग्यारह और खनन परियोजनाओं के लिए नीलामी की योजना बनाई जा रही है। इस बीच, हमने पिछले फॉलो-अप में इस बात की ओर ध्‍यान दिलाया था कि कैसे सिजिमाली एक अघोषित संघर्ष-क्षेत्र में बदल रहा था, जो आने वाली घटनाओं का एक गंभीर संकेत था। उस कहानी के प्रकाशन के हफ्ते भर बाद ही कंटामाल गांव में पुलिस का कहर बरपा।

उसके बाद बीते करीब तीन महीनों का घटनाक्रम नीचे दिया जा रहा है। यह घटनाक्रम, जिसके पहले अध्याय की जमीनी रिपोर्ट हमने 2023 में यहां की थी, भारत के पूर्वी घाटों में आदिवासी समुदायों के जीवन और आजीविका के लिए खतरा पैदा करने वाले संकटों के तेज होते जाने की तरफ इशारा करता है। पूर्वी घाटों की जैव-विविधता, प्रकृति और पर्यावरण विनाश की ओर बढ़ रहा है। फिर भी पूर्वी घाट को बचाने के लिए पहाड़ के लोगों का संघर्ष जारी है।

रायगड़ा पुलिस ने 3 अप्रैल को कंटामाल गांव में लाउडस्पीकर से निषेधाज्ञा की घोषणा की। खनन क्षेत्र के लिए बनाई जा रही पहुंच सड़क के 100 मीटर के भीतर चार से अधिक लोगों के समूह में लोगों को इकट्ठा होने से प्रतिबंधित किया गया। जैसे ही भारी संख्या में पुलिसबल की उपस्थिति के साथ निर्माण कार्य शुरू हुआ, ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र हो गए और क्षेत्र में उनके प्रवेश को रोक दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि न तो पर्यावरणीय मंजूरी और न ही ग्राम सभा की सहमति उचित प्रक्रिया के अनुसार ली गई थी। पहुंच मार्ग के निर्माण को रोकने की मांग करने वाली एक याचिका भी अदालत में लंबित है। मां माटी माली सुरक्षा मंच ने निषेधाज्ञा की खुली अवहेलना की थी। इसके कारण 6-7 अप्रैल की दरमियानी रात बर्बर हमला हुआ।

प्रवेश द्वार को बाधित किए जाने के तीन दिनों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस 6-7 अप्रैल की रात लगभग 2.30 बजे कंटामाल गांव में पहुंची और उसने पूरे गांव को घेर लिया। पुलिस के साथ कई आधे नकाबपोश लोग भी थे। लोग अपने घरों से भागते हुए बाहर आए, कई पुलिस की लाठियों से घायल हो गए। दो महिलाओं के सिर में चोट आई है। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। एक आंसू गैस के गोले से एस्बेस्टस की छत पर निशाना साधा गया और वह अंदर सो रहे लोगों पर गिर गया। एक व्यापारी का वाहन पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। एक गाय को भी मार डाला गया।



हमें बताया गया कि शुरू में कई ग्रामीणों ने सोचा था कि उन पर चोरों ने हमला किया है, हालांकि पुलिस को देखकर वे उससे भिड़ गए। पुलिस कई बसों के साथ आई थी, शायद ग्रामीणों को गिरफ्तार कर के ले जाने के लिए, जैसा उसने तला आमपदर में किया यह था। हिंसा सुबह सात बजे तक जारी रही, फिर पुलिस हवाई गोलीबारी के बाद लौट गई। सत्तर से अधिक लोग घायल हो गए थे। जिला प्रशासन के इस दुस्साहसिक बलप्रयोग से पूरा गांव आक्रोशित हो उठा। लोगों को चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी।

ग्रामीणों ने लगातार एक बात कही कि उन्हें डर महसूस नहीं हुआ। कुछ महिलाओं ने कहा कि सुबह होने पर ही उन्हें शारीरिक दर्द, थकावट और हताशा का अहसास हुआ। ये महिलाएं एक स्वर में रो रही थीं और अपने तीज राजा, नियमराजा, खंडुआल राजा व अन्य देवताओं से विनती कर रही थीं कि वे अब आएं और उनकी रक्षा करें, जैसे उन्होंने हमेशा से पहाड़ियों और देवताओं की रक्षा की थी। एक युवक के अनुसार, देवताओं ने उनकी पुकार सुनी और सभी राजनीतिक दलों और पूरे मीडिया को उनके दूरदराज के गांव में भेज दिया ताकि बॉक्साइट के लिए धरती को खोदने के लालची प्रयास में सिजिमाली के आदिवासियों और दलितों के साथ हुए दर्दनाक अन्याय का दुनिया को पता चल सके।

जैसे ही कंटामाल पर पुलिस की कार्रवाई की खबर मंगलवार 7 अप्रैल की सुबह बाहर पहुंची, इसने विरोध प्रदर्शनों, बयानों, पदयात्राओं और सिजिमाली के दौरे के माध्यम से अभूतपूर्व एकजुटता को प्रेरित किया।

भुवनेश्वर में कंसर्न्ड सिटिजंस फोरम के करीब 60 संगठनों और व्यक्तियों ने मुख्यमंत्री मोहन मांझी को एक खुला पत्र भेजकर इस बात की निंदा की कि खनन कार्यों का विरोध करने के लिए आदिवासियों और दलितों को लगातार पुलिस दमन का सामना करना पड़ रहा है। फोरम ने निषेधाज्ञा और 2023 के खनन पट्टे को भी रद्द करने की मांग की। इसमें इलाके में तैनात पूरे पुलिसबल को वापस बुलाने और ड्रोन निगरानी को खत्म करने की मांग की गई है। इसमें ग्रामीणों पर थोपे गए सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने और जेल में बंद लोगों की रिहाई की मांग की गई है।

अगले दिन 8 अप्रैल को पुलिस दमन की निंदा करते हुए और सभी खनन कार्य को समाप्त करने की मांग उठाते हुए एक उत्साही विरोध प्रदर्शन किया गया। वेदांता के साथ खनन पट्टे को रद्द करने, लोगों पर थोपे गए मनगढ़ंत मामलों को वापस लेने और लिंगराज आजाद और सुरेश संग्राम सहित कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर सिजिमाली में हुई बैठकों और रैलियों में समाजवादी जन परिषद लगातार मौजूद थी। चार वाम दलों- माकपा, भाकपा, भाकपा (माले) लिबरेशन और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने राज्यपाल से मुलाकात की और अपना विरोध दर्ज कराया। 10 अप्रैल को इन दलों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र का दौरा किया, गवाहियां सुनीं और रायगड़ा के जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा।


Letter of BJP MP from Kalahandi on Kantamal Violence
कालाहांडी की भाजपा सांसद तक को सिजिमाली की घटनाओं पर चिट्ठी लिखनी पड़ी

चार वाम दलों ने 13 अप्रैल को ओडिशा के राज्यपाल से जोरदार अपील की। इनमें एसयूसीआइ (कम्युनिस्ट), भाकपा (माले), भाकपा (माले) रेड स्टार और भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी शामिल हैं। इन चार दलों ने सिजिमाली में बिना किसी उचित प्रक्रिया के कॉर्पोरेट हितों के लिए संरक्षित भूमि के हस्तांतरण और कथित दमन के खिलाफ कई ब्लॉकों, उप-मंडल कार्यालयों और कई जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने माली पर्वत (सिमिलिगुड़ा), सेरुबंधा (पोट्टांगी), नागेश्वरीमाली (नंदापुर), पाटणा (क्योंझर) और लांजीबेरना (सुंदरगढ़) जैसे क्षेत्रों में खनन और अन्य कॉर्पोरेट परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की।

कांग्रेस, बीजू जनता दल और यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी जैसी मुख्यधारा की पार्टियों ने भी इस क्षेत्र का दौरा किया। राष्ट्रीय युवा कांग्रेस ने 22-28 मई को एक सप्ताह की पदयात्रा निकाली थी। यह 2023 से बिलकुल उलट है जब इस इलाके में बॉक्साइट खनन परियोजना की घोषणा की गई थी। उस समय भी परियोजना का विरोध करने वाले लोगों की गिरफ्तारियां हुई थीं और क्रूर दमन किया गया था, लेकिन तब और संसदीय दलों की पथरीली चुप्पी साध ली थी। उस समय पहली बार इस क्षेत्र में खनन के खिलाफ खुल रहे मोर्चे पर फॉलो-अप स्‍टोरीज ने ग्राउंड रिपोर्ट छापी थी।

यहां तक कि मुख्यधारा और सोशल मीडिया ने भी राज्य और कॉर्पोरेट समर्थित बॉक्साइट खनन की राह बनाने के लिए ग्रामीणों पर की गई क्रूर हिंसा की स्पष्ट रूप से निंदा की है। इस बार की प्रतिक्रिया अपनी व्यापकता के लिहाज से उल्लेखनीय रही, जिसने राजनीतिक दलों, नागरिक समाज समूहों, कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं और मीडिया की चिंता और निंदा को आकर्षित किया।

हाल ही में 13 जून को अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा (एआइकेएमकेएस) ने सिजिमाली और कुटरूमाली की रक्षा के लिए एकजुटता रैली और सार्वजनिक बैठक आयोजित की। यह रायगडा और कोरापुट जिलों की सीमा से लगे कुंभारपुट में आयोजित की गई थी।

रायगड़ा पुलिस ने 6-7 अप्रैल को कंटामाल में ग्रामीणों द्वारा पुलिसिया दमन के प्रतिरोध और निषेधाज्ञा की अवहेलना पर कई एफआइआर दर्ज की। पुलिस ने प्रेस को भी संबोधित किया। इन घटनाओं की संक्षिप्त रूपरेखा निम्नलिखित है।

कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने 6 अप्रैल की रात 11.18 बजे लोगों के खिलाफ 3 अप्रैल की निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों और निर्माण श्रमिकों पर “घातक हथियारों” से हमला करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की। एफआइआर में लगभग 60 नामजद ग्रामीणों के साथ-साथ 300 “अन्य” को आरोपी बनाया गया है। इसी एफआइआर के आधार पर उस रात राइफल, आंसू गैस के गोले और लाठियों से लैस पुलिस की बारह प्लाटूनें कई बोलेरो और बसों से कंटामल पहुंची थीं। पुलिस अधीक्षक ने अगले दिन प्रेस को संबोधित किया और कहा कि पुलिस ने एक फरार आरोपी को नोटिस देने और पकड़ने के लिए कंटामाल में प्रवेश किया किया।

अगली सुबह ज्यादातर अखबारों की सुर्खियां और टीवी चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज इस बात को लेकर थीं कि कैसे कंटामाल के ग्रामीणों ने पुलिस पर हमला किया। मीडिया का यह फर्जी शोर बमुश्किल एक दिन ही टिक सका, जिसके बाद सच्चाई सामने आ गई। फिर उसी मीडिया ने पुलिस के बयान पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। जनसंगठनों और मीडिया ने एक व्यक्ति को पकड़ने के नाम पर बड़े पैमाने पर चलाए गए पुलिस अभियान को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल किए गए षड्यंत्रों का पर्दाफाश किया।

पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआइआर में कहा गया है कि वहां तीन टीमें थीं: एक कंटामाल के प्रवेश द्वार पर, दूसरी गांव के पीछे के छोर पर, और तीसरी बंडेल में तैनात थी जो कंटामाल की ओर जाने वाली सड़क पर 700 मीटर दूर है। यानी पूरे गांव को घेर लिया गया था।


Some injured from Kantamal Police Action
कंटामाल में हुए पुलिस हमले में घायलों की कुछ तस्वीर
5 June meeting at Koraput
कोरापुट में 5 जून को हुई विरोध सभा

एक एफआइआर में भवानीपटना के डॉ. रैन्‍डल सिक्वेरा का नाम दर्ज है। उन्होंने 9 अप्रैल को घायलों का इलाज कराया था। इसी एफआइआर में आसपास के गांवों से मां माटी माली सुरक्षा मंच के नौ अन्य प्रमुख सदस्यों के नाम भी शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने 6-7 अप्रैल को पुलिस पर हमले का नेतृत्व किया जबकि हकीकत ये है कि उस रात इन दस में से कोई भी कंटामाल में नहीं था। 

एफआइआर से पता चलता है कि पुलिस की 12 प्लाटूनों, 15 बसों और 20 बोलेरो से कंटामाल को घेरा गया था। 6-7 अप्रैल की रात को जो लोग मौजूद थे और पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे थे, उनमें न केवल काशीपुर प्रशासन बल्कि आसपास के ब्‍लॉकों से एसडीएम, अतिरिक्त तहसीलदार, आइआइसी, इंस्पेक्टर और सब-इंस्‍पेक्‍टर भी शामिल थे।

5 अप्रैल से 7 अप्रैल तक कुल 800 अन्य के साथ 156 ग्रामीणों को एफआइआर में नामजद किया गया। अगर हम उससे पिछले हफ्तों की तीन एफआइआर को भी जोड़ लें, तो यह संख्या बढ़ जाती है। 11 मार्च को तला आमपदर में 40-50 अन्य लोगों के साथ 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसी तरह, 8 मार्च को दर्ज की गई एक प्राथमिकी में 40 लोगों के साथ 300 अन्य लोगों के नाम हैं। गौरतलब है कि 8 मार्च से 8 अप्रैल के बीच एक महीने की अवधि में कुल 24 गिरफ्तारियां हुई हैं सभी एफआइआर में 217 नामजद तथा 1140 अन्य आरोपी बनाए गए हैं। ये एफआइआर दिखाती हैं कि कैसे समूचे जनआंदोलन का अपराधीकरण किया जा रहा है।

पुलिस के हमले से पहले 25 मार्च को कालाहांडी पुलिस ने समाजवादी जन परिषद के अध्यक्ष लिंगराज आजाद और सुरेश संग्राम को भवानीपटना स्थित उनके आवासों से गिरफ्तार किया था।

मां माटी माली सुरक्षा मंच के नेतृत्व में खनन विरोधी आंदोलन के सक्रिय समर्थकों के रूप में, 23 मार्च को दोनों पुलिंगपदर के पास कुरकुट्टी में विरोधस्थल पर मौजूद थे। उस दिन ग्रामीण कालाहांडी पुलिस और प्रशासन द्वारा पेड़ों को काटने और बुलडोजर का उपयोग करके उन लोगों के लिए पुनर्वास स्थल के रूप में भूमि को समतल करने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्हें वेदांता की परियोजना के लिए तिजिमाली गांव से विस्थापित किया जाएगा। उन पर गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने, हत्या के प्रयास और डकैती सहित बीएनएस की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

दोनों को 18 अप्रैल को जमानत मिल गई थी, हालांकि उनकी रिहाई से ठीक पहले लिंगराज आजाद पर जबरन वसूली का एक नया मामला थोपा गया ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके और उनकी कैद को लम्बा खींचा जा सके। यह मामला अब उच्च न्यायालय में लंबित है।

  • 18 अप्रैल को भवानीपटना के सुरेश संग्राम को भवानीपटना जिला जेल से रिहा किया गया।
  • 21 अप्रैल को बनतेज गांव के लाबन्या नाइक और पद्मन नाइक को भवानीपटना जिला जेल से रिहा कर दिया गया।
  • 24 अप्रैल को भवानीपटना जिला जेल से तला आमपदर गांव की नौ महिलाओं को रिहा किया गया था।
  • 18 मई को बनतेज गांव के उमाकांत नाइक को रायगड़ा जिला जेल से रिहा कर दिया गया था।
  • 23 मई को तला आमपदर गांव की उमुरू माझी को भवानीपटना जिला जेल से रिहा कर दिया गया।
  • 19 मई को भवानीपटना जिला अदालत ने तला आमपदर के 11 लोगों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने उच्च न्यायालय में अपील की है। 
  • 10 जून को तला आमपदर के 11 लोगों ने निचली अदालत में जमानत हासिल कर ली। उन्हें अपने आप जमानत मिल गई क्योंकि पुलिस ने कानूनी रूप से अनिवार्य 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दायर नहीं किया था।

Released women from Talaampadar bein celebrated
Released women from Talaampadar bein celebrated
तला आमपदर गांव की नौ महिलाओं की रिहाई का स्वागत

अक्सर जेल से रिहा होने में देरी होती है क्योंकि जमीन के कागज के अलावा 30,000 रुपये की जमानत राशि की उम्मीद की जाती है। ग्रामीणों को बेतरतीब ढंग से उठाते समय पुलिस की लापरवाही के कारण भी देरी होती है क्योंकि नाम गलत चढ़ा दिया जाता है। उदाहरण के लिए, उमुरु माझी को 24 अप्रैल को तला आमपदर की अन्य महिलाओं के साथ रिहा नहीं किया जा सका क्योंकि उनके असली नाम को लेकर भ्रम की स्थिति थी. इसलिए उन्होंने एक महीना और जेल में बिताया।

अपने ऊपर होने वाले ऐसे कानूनी हमलों के जवाब में ग्रामीणों ने अक्सर सवाल किया है कि क्या वे भी पलट कर एफआइआर नहीं कर सकते? सवाल है कि जब उनकी ही जिला पुलिस उनके ऊपर हिंसक हमला करती है, तो वे न्याय के लिए किसका दरवाजा खटखटाने जाएं? वे आइआइसी और उच्च अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने उसी थाने में कैसे जा सकते हैं?

ग्रामीणों ने 6-7 अप्रैल की दरमियानी रात रायगड़ा पुलिस द्वारा की गई हिंसा का वर्णन करते हुए राज्य के आइजी को 18 मई को एक पत्र भेजा। जिन लोगों को गंभीर चोटें आई थीं, उन्होंने उस रात की आपबीती का वर्णन उस पत्र में किया। पत्र में उपस्थित जिला प्रशासन के कई अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों और संबंधित थानों के नाम हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे पुलिस के साथ आधी वर्दी में कई नकाबपोश लोग आए थे। चिट्ठी में बच्चों के ऊपर आंसू गैस के घातक असर का वर्णन है जो रो रहे थे, खांस रहे थे और उल्टी कर रहे थे। कई ग्रामीणों की आंखों से धार बह रही थी और सांस उखड़ गई थी। वे अचेत होने के कारण लगातार दो दिनों तक कुछ भी बोल पाने में असमर्थ थे। पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ हाथापाई किए जाने की बात भी पत्र में है।

कुटरूमाली के लिए नीलामी प्रक्रिया नवंबर 2022 में शुरू हुई थी। फरवरी 2023 में ओडिशा सरकार ने कलिंग एल्यूमिना लिमिटेड (अदाणी समूह की एक कंपनी) को तरजीही बिडर घोषित किया और उसे एक आशयपत्र जारी किया।

कुटरूमाली में बॉक्साइट का अनुमानित भंडार 127 मिलियन टन है। कंपनी की एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (ईआइए) रिपोर्ट के मुताबिक, खनन के लिए कुल 1734 एकड़ जमीन की जरूरत है। इसमें से वन भूमि 491 एकड़ है। पहुंच रोड के निर्माण के लिए दो एकड़ वन भूमि की आवश्यकता है। इसके अलावा 181 एकड़ व्यक्तिगत पट्टा भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। बाकी में बंजर भूमि (1046 एकड़), चराई भूमि और घर शामिल हैं। ये जमीनें थुआमुल रामपुर ब्लॉक की करपाई पंचायत (कुटरूमाली, माझीगांव, मेलराफा, मुरलीमुहिन, पोडापाई, सलाबली, ताइझोला), काशीपुर ब्लॉक की मंडीबिशी पंचायत (अलुतुंगा, पदेलगुडा, सपाई, लेलिंगपदर) और कल्याणसिंहपुर ब्लॉक की करपा पंचायत (हेचकाना, हीरासुली, सदलास, सिंगपाटा) में हैं।

अगर खनन होता है तो 82 परिवारों के 200 लोग विस्थापित हो जाएंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खनन के लिए रोजाना 7,20,000 लीटर पानी का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे खनन क्षेत्र से दो किलोमीटर उत्तर में बहने वाली नरगुल धारा में एक इनटेक वेल खोदकर निकाला जाएगा। कंपनी सालाना चार मिलियन टन की दर से बॉक्साइट निकालेगी और खदान 29 वर्षों तक काम करेगी। इस परियोजना में कुल 425 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे 246 स्थायी नौकरियां पैदा होंगी।

इस परियोजना की पर्यावरण मंजूरी के लिए ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 8 अप्रैल, 2026 को एक नोटिस प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक सुनवाई दो स्थानों पर आयोजित की जाएगी। इसमें कहा गया है कि 12 मई को थुआमुल रामपुर और 13 मई को काशीपुर में जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा। 23 अप्रैल को भुवनेश्वर के कार्यकर्ताओं ने तुरंत ओएसपीसीबी अधिकारियों से तलामपदर और कंटामाल में पुलिस दमन के कारण उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जनसुनवाई को रोकने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल ने सदस्य सचिव मनोज वी. नायर को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया था कि तलामपदर और कंटामाल में पुलिस के दमन के कारण सिजिमाली क्षेत्र में तनाव बना हुआ है इसलिए सामान्य स्थिति लौटने तक जनसुनवाई को रोक दिया जाना चाहिए।



इसमें यह भी बताया गया है कि वर्तमान में जनसुनवाई के लिए जिन स्थानों को अंतिम रूप दिया गया है, वे प्रभावित गांवों से लगभग 50 किलोमीटर दूर हैं, जो जनसुनवाई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। जहां लोग रहते हैं, वहां जनसुनवाई होनी चाहिए ताकि वे ग्राम सभा होने के बाद निडर होकर अपनी राय व्यक्त कर सकें। इसके बाद कुटरूमाली क्षेत्र के सरपंचों सहित अन्य समूहों ने भी जनसुनवाई रद्द करने की अपील की।

कुटरूमाली के खनन प्रभावित गांवों में भी जनसुनवाई के खिलाफ प्रतिक्रियाएं सामने आईं। सिजिमाली की सार्वजनिक सुनवाई के अपने अनुभव से वे जानते थे कि अगर उन्होंने अपनी असहमति व्यक्त भी की तो रिपोर्ट में दावा किया जाएगा कि जनता की राय परियोजना के पक्ष में थी। इसलिए, जनसुनवाई का बहिष्कार करने का निर्णय लेते हुए मां माटी माली सुरक्षा मंच ने कुटरूमाली के आसपास पदयात्रा का आह्वान किया, जो 3 मई को शुरू हुई। इसमें सिजिमाली, खंडुआलमाली और नियमगिरी आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। पदयात्रा के अंत में 12 मई को केरपाई में समानांतर जनसुनवाई का आयोजन किया गया। उसमें निम्नलिखित प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए:

  • पहला, कुटरूमाली बॉक्साइट खनन से प्रभावित सभी गांव अनुसूचित क्षेत्र में स्थित हैं। संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम के तहत, अनुसूचित क्षेत्र में नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि के लिए संबंधित क्षेत्र की ग्राम सभा की मंजूरी की आवश्यकता होती है, लेकिन अदाणी समूह की कंपनी “मैसर्स कलिंग एल्यूमिना लिमिटेड” को कुटरूमाली पट्टे पर देने से पहले इस नियम का पालन नहीं किया गया।
  • दूसरा, खनन के लिए वन भूमि के उपयोग के लिए वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत ग्राम सभा और ग्रामस्तरीय संस्थानों की मंजूरी की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके लिए कोई ग्राम सभा नहीं हुई है और न ही सहमति ली गई है।
  • तीसरा, हमारी आजीविका के प्राथमिक स्रोत पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों- जैसे कि जलधाराओं पर निर्भर खेती, पेड़ों और पत्तियों, औषधीय पौधों, मिट्टी और चट्टानों, देवताओं के पवित्र उपवन, वायु और वन्यजीवों- की रक्षा करने के लिए हम लोग, इस क्षेत्र के सभी निवासी, लगातार सिजिमाली, कुटरूमाली और मझिंगामाली की पर्वत श्रृंखलाओं में बॉक्साइट खनन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते आ रहे हैं।
  • चौथा, कुटरूमाली बॉक्साइट खदान की पर्यावरण मंजूरी के लिए जनसुनवाई के लिए प्रस्तावित स्थान प्रभावित गांवों से लगभग 30 से 50 किलोमीटर दूर स्थित हैं, जिससे लोगों के लिए उसमें हिस्‍सा लेने के लिए इतनी दूरी तय करना असंभव है। हमारी राय में, राज्य सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इतनी दूरी पर जनसुनवाई आयोजित करने का निर्णय अदाणी समूह के हितों की रक्षा के उद्देश्य से कियाग या एक जनविरोधी प्रयास है।
  • पांचवां, सिजिमाली क्षेत्र में वेदांता के प्रस्तावित खनन का विरोध करते हुए लंबे समय से जन आंदोलन चल रहा है। शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे जन आंदोलन के बावजूद, बीएनएस की धारा 163 के तहत 3 अप्रैल से शुरू होने वाले सड़क निर्माण के लिए निषेधाज्ञा लागू की गई। 6 अप्रैल की मध्यरात्रि से 7 अप्रैल की सुबह तक पूरे क्षेत्र में चलाई गई क्रूर और अमानवीय पुलिस कार्रवाई से आतंकित किया गया। ऐसे में हमें लगता है कि कुटरूमाली बॉक्साइट खदान अदाणी कंपनी को सौंपने का फैसला सरकार, कंपनी और पुलिस-प्रशासन की सुनियोजित साजिश है।
  • इस संदर्भ में, प्रस्तावित बॉक्साइट खनन से प्रभावित होने वाले कुटरूमाली क्षेत्र के हम स्थानीय निवासी और ग्रामीण खनन पट्टे को रद्द करने के लिए इस जनसुनवाई के माध्यम से एक सामूहिक संकल्प लेते हैं ताकि अपनी आजीविका, पर्यावरण और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की हम रक्षा कर सकें।

आखिरकार, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 5 मई को सार्वजनिक नोटिस जारी किया जिसमें बताया गया कि दोनों स्थानों पर प्रस्‍तावित जनसुनवाई स्थगित कर दी गई है।


Notice on postponement of public hearing
प्रस्‍तावित जनसुनवाई स्थगित किए जाने की अधिसूचना

आज सिजिमाली-कुटरूमाली-मझिंगामाली क्षेत्र के साथ-साथ पूर्वी घाटों की पर्वत श्रृंखला में पहाड़ियों, डोंगरों, नालों और जंगलों को बॉक्साइट खनन के खतरों से बचाने के लिए कई स्थानों पर समानांतर आंदोलन उभर चुके हैं- जैसे कि नंदापुर (नागेश्वरी पहाड़ी), पोट्टांगी (सेरुबंधा) और माली पर्वत (सिमिलीगुड़ा)।

लक्ष्मीपुर ब्लॉक में कोडिंगमाली बॉक्साइट खदान के विस्तार के खिलाफ विरोध के स्वर उठ रहे हैं। इसी तरह लोग नारायणपटना ब्लॉक में कर्णपोडिकोंडा बॉक्साइट खदान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं, जो वेदांता को पट्टे पर दी गई है। सरकार ऐसे में एकतरफा ढंग से पूरी ताकत और जोर-जबरदस्‍ती के साथ इप परियोजनाओं पर आगे बढ़ रही है।

कंटामाल में हुई पुलिस की कार्रवाई के दो हफ्ते बाद 21 अप्रैल को रेलवे विभाग ने एक अधिसूचना जारी की कि बॉक्साइट की ढुलाई की सुविधा के लिए सिजिमाली-कुटरूमाली खनन क्षेत्र से टिकिरी रेलवे स्टेशन तक एक रेलवे लाइन का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद 5 मई, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने खनन क्षेत्र के लिए संपर्क सड़क के निर्माण के लिए अंतिम वन मंजूरी प्रदान की। यह मामला एनजीटी में लंबित था, जहां ग्रामीणों ने स्टेज 1 क्लीयरेंस को चुनौती दी थी।

15 मई को लांजीगढ़ की एक अदालत ने नियमगिरी सुरक्षा समिति के प्रमुख नेता लद सिकाका की संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया। 29 मई, 2026 को ओडिशा सरकार के इस्पात और खान विभाग ने 5 नई बॉक्साइट खदानों की नीलामी के लिए निविदाएं जारी कीं। इनमें करलापट (कालाहांडी जिला) और नुनापाईमाली, टिकरीमाली-बुधराजमाली, टिकरीगुडा-मालीगुडा और नंगलमझिमाली (रायगड़ा जिला) शामिल हैं।


Concerned Citizens statement on Lada Sikaka
लद सिकाका (तस्वीर में) की संपत्तियों को कुर्क किए जाने के खिलाफ सरोकारी नागरिकों का बयान

अखबारी रिपोर्टों से पता चला है कि वेदांता और अदाणी रायगड़ा जिले के कल्याणसिंहपुर और कोलनारा ब्लॉक में नई एल्यूमिना रिफाइनरी स्थापित करने के लिए लगातार भूमि अधिग्रहण कर रहे हैं।

3 जून को ओडिशा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोडिंगामाली बॉक्साइट खदान की उत्पादन क्षमता को तीन मिलियन टन से बढ़ाकर 4.2 मिलियन टन सालाना करने के लिए एक जनसुनवाई आयोजित करने की अधिसूचना प्रकाशित की थी। जनसुनवाई 21 जून को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्‍न हुई, जिसमें सात गांवों के करीब पांच सौ लोगों ने हिस्‍सा लिया और अपने इलाके में व्‍याप्‍त समस्‍याओं पर लिखित ओर मौखिक शिकायत दर्ज करवाई।

विश्‍व पर्यावरण दिवस पर 5 जून को कोरापुटिया जन सुरक्षा संघ और सेंटर फॉर क्लाइमेट जस्टिस के आह्वान पर सिमिलीगुड़ा के पास बांगुरुगुड़ा में एक विशाल जनसभा हुई। माली पर्वत, सेरुबंधा, बालदा, सिजिमाली, कुटरूमाली, नियमगिरी, देवमाली, कर्णकोंडामाली और गंधमार्दन में चले ओडिशा के पहले बॉक्साइट खनन विरोधी आंदोलन से वहां हजारों लोग आए थे। पूर्वी घाट पर्वत श्रृंखला में सभी नई बॉक्साइट खनन परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाने की सर्वसम्मति से मांग की गई। मां माटी माली सुरक्षा मंच ने इस अवसर पर एक पर्चा जारी कर के पूर्वी घाट पर्वत श्रृंखला के सभी आंदोलनों के बीच एकता कायम करने का आग्रह किया।


संकलनकर्ता: सिद्धार्थ कार और रंजना पाढ़ी

संपर्क: formountainsandforests@gmail.com
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