मुखौटा गिर चुका है: शासक की निजी डिजिटल जागीर बनते जा रहे देश और नागरिक के सवाल पर
byदुनिया की राजनीति और आर्थिकी आपस में मिलकर कैसे आधुनिक राज्य के चरित्र को बदल रही है; सम्प्रभु लोकतांत्रिक राष्ट्रों के भीतर चुनी हुई सरकार और नागरिक के बीच का रिश्ता कैसे विकृत हो रहा है; और अपनी अंतर्वस्तु व स्वरूप में हर लोकशाही कैसे राजशाही की ओर बढ़ रही है; इन विषयों पर दुनिया भर में कोरोना के बाद से बहुत चर्चा हुई है। भारत अपवाद है। यहां राज्य-सम्बंधी विमर्श नदारद दिखता है जबकि पांचसाला चुनाव ही विमर्शों के केंद्र में रहता है। फॉलो-अप स्टोरीज़ के संरक्षक रहे दिवंगत शिक्षाविद् अनिल चौधरी राज्य, सरकार, कानून और समाज की जटिल गुत्थी पर लगातार बोलते थे। उनके 76वें जन्मदिवस पर दिल्ली में आयोजित सम्मिलन इसी विषय पर परिचर्चा का बायस बना। सम्मिलन में प्रस्तुत अरुण सिंह का लिखा यह आधारपत्र बदलती हुई दुनिया पर कुछ रोशनी डालता है