‘नबाम रेबिया’ का मुकदमा और भुला दी गई एक मौत
सात साल बाद जिस फैसले की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट की उच्च पीठ से अभी होनी बाकी है, उसने नबाम रेबिया का नाम तो न्यायिक इतिहास में दर्ज कर दिया लेकिन कलिखो पुल को हमेशा के लिए मिटा दिया
सात साल बाद जिस फैसले की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट की उच्च पीठ से अभी होनी बाकी है, उसने नबाम रेबिया का नाम तो न्यायिक इतिहास में दर्ज कर दिया लेकिन कलिखो पुल को हमेशा के लिए मिटा दिया
कई ग्रामीणों को हिरासत में लिया गया है। कुछ ग्रामीण घायल भी हुए हैं। ग्रामीणों की पत्थरबाजी में पुलिस को चोट लगने की बात भी सामने आ रही है। पिछले दो दशक के दौरान यह परियोजना विभिन्न कारणों से उठती गिरती रही है लेकिन पहली बार यहां ऐसी हिंसा हुई है।
1979 में जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दिए जाने के बाद पाकिस्तान की पॉलिटिकल क्लास ने सेना के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं दिखाई थी। बेनजीर भुट्टो की हत्या ने सेना के खौफ को और मजबूत ही किया था, लेकिन इस बार स्थिति उलटी है
पिछले चुनाव में अगर दस हजार करोड़ का प्रचार खर्च आया था जो रिकॉर्ड था, तो अबकी नौ गुना ज्यादा बॉन्डों की बिक्री के साथ कुल चुनावी खर्च कायदे से एक लाख करोड़ के आसपास पहुंच जाना चाहिए, हालांकि यह गणित इतना सीधा नहीं है
भाजपा के बंगाली हनुमान निभास सरकार, जो मई 2019 में हंसी-खुशी चुनाव प्रचार कर रहे थे, पांच महीने में ऐसे किस दुख से घिर गए कि उन्हें जान देनी पड़ गई? जबकि जिस पार्टी का उन्होंने प्रचार किया, उसकी केंद्र में सरकार भी बन गई थी?
पत्र की ऐसी भाषा सीधे राजभवन से आए आदेश की नहीं रही होगी क्योंकि यह पत्र गृह विभाग द्वारा जारी किया गया है
सोशल मीडिया पर जिस पत्र को ईडी का ‘माफीनामा’ कहा जा रहा है वह पत्र वास्तव में यह कह रहा है कि संजय सिंह ने नोटिस भेजकर गलती कर दी है और यह मामला पलट कर उनके खिलाफ भी जा सकता है।