‘MNREGA में बदलाव बहाना है, मकसद गुलाम बनाना है’! क्यों? कैसे? एक सरल तुलनात्मक विश्लेषण
byसंसद में 18 दिसंबर को पारित और तीन दिन के भीतर ही राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत वीबी-जीरामजी नाम का नया विधेयक मनरेगा के ताबूत में केंद्र सरकार की आखिरी कील साबित होने जा रहा है। पिछले ग्यारह साल से ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून को कमजोर करने में लगी सरकार ने अब उसे मांग-आधारित अधिकार से एनजीओछाप आपूर्ति-आधारित मिशन में तब्दील कर के उसकी आत्मा को खोखला कर दिया है। नतीजतन, देश भर में ग्रामीण मजदूर और खेतिहर आंदोलन पर हैं। मनरेगा और वीबी-जीरामजी का सरल शब्दों में अरुण सिंह ने तुलनात्मक विश्लेषण किया है, जो हर कार्यकर्ता और पत्रकार के लिए एक जरूरी पाठ है