कुम्भ-2025: एक अपराधी की सरकारी प्रेरक-कथा में छुपी मल्लाहों की सामूहिक व्यथा
byकुम्भ के दौरान एक नाविक की पैंतालीस दिन में हुई तीस करोड़ रुपये की कमाई वाला यूपी के मुख्यमंत्री का असेंबली में दिया बयान इलाहाबाद के मल्लाहों के गले की फांस बन गया है। डेढ़ महीने के कुम्भ में बमुश्किल औसतन बीस-पचीस हजार रुपया कमा पाने वाले अधिसंख्य नाविक प्रशासन और ठेकेदारों के आपराधिक गठजोड़ तले दम तोड़ रहे हैं, जिसने नदी पर आश्रित समुदाय की आजीविका के सारे स्रोत ठेके पर उठा दिए हैं। कुम्भ के आयोजन के नाम पर इस बार जो कुछ भी हुआ है, पिंटू महारा उस मॉडल को समझने का प्रतीक है। संगम से सुशील मानव की फॉलो-अप रिपोर्ट