BJP

Tomb of Nawab Abdul Samad in Fatehpur, UP

फतेहपुर : हिंदुत्‍व की पुरानी समझदारी से इबादतगाहों के नए विवादों को समझने की अड़चनें

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देश की सेकुलर जमातों के ऊपर बाबरी विध्‍वंस का कर्ज इस कदर हावी है कि पिछले साल संभल हो, इस साल बहराइच या ताजा-ताजा फतेहपुर, हर जगह उन्‍हें नई अयोध्‍या ही बनती दिखाई देती है। इसके बरक्‍स, हर बार राज्‍य का धर्म में हस्‍तक्षेप और प्रत्‍यक्ष होता जाता है; हिंदुत्‍व की राजनीति और जटिल होती जाती है; जबकि हर बार जमीन पर बहुसंख्‍यकों की गोलबंदी कमतर। अयोध्‍या की घटना तो एक सुगठित आंदोलन की परिणति थी, लेकिन फतेहपुर के मकबरे पर इस माह दिखे बाबरी जैसे दृश्‍य? बाबरी के मुहावरे में आज के हिंदुत्‍व को समझना क्‍यों भ्रामक हो सकता है, संभल और फतेहपुर की जमीन से बता रहे हैं शरद और गौरव

RSS-BJP

संघ-भाजपा समन्वय सूत्र : सत्ता सर्वोपरि, हिन्दुत्व बोले तो वक्त की नजाकत और पब्लिक का मूड!

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आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत चार-छह महीने के अंतराल पर बौद्धिक कसरत के लिए कोई न कोई बयान दे देते हैं। आम चुनाव के दौरान संघ पर भाजपा की निर्भरता खत्‍म होने संबंधी जेपी नड्डा के औचक बयान के बाद बयानबाजियों और अटकलबाजियों का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसमें संघ-भाजपा के परस्‍पर शक्ति संतुलन को लेकर अजीबोगरीब निष्‍कर्ष निकाले गए। बावजूद इसके, भाजपा चुनाव जीतती गई। केवल उत्‍तर प्रदेश अपवाद रहा, जहां के संभल के संदर्भ में भागवत का एक बयान लंबे समय बाद आया है और संघ-भाजपा के रिश्‍तों पर फिर से पहेलियां बुझायी जा रही हैं। ‘आत्‍मनिर्भर भाजपा’ शीर्षक से 27 मई को लिखे अपने लेख का ‍सिरा पकड़ कर व्‍यालोक ने एक बार फिर इस मसले को नई रोशनी में देखने की कोशिश की है

जन-प्रतिनिधियों को ‘सेल्समैन’ और अपने कार्यकर्ताओं को ‘डेटा चोर’ क्यों बना रही है भाजपा?

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चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनने की भाजपा की ख्‍वाहिश ने न सिर्फ करोड़ों आम लोगों को अनजाने में उसका प्राथमिक सदस्‍य बना दिया है, बल्कि पार्टी का आंतरिक चरित्र भी बदल डाला है। अब भाजपा के नेता और जन-प्रतिनिधि नेतृत्‍व के दिए ‘टारगेट’ की खुलेआम सेल्‍समैनी कर रहे हैं और उसके कार्यकर्ता धोखे से लोगों का डेटा चुरा रहे हैं- महज पांच, दस, बीस, रुपये के लिए! उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड से अमन गुप्‍ता की रिपोर्ट

Bulldozer Politics

बीता आम चुनाव क्या हिंदुत्‍व के बुलडोजर की राह में महज एक ठोकर था?

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आम चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक पंडितों ने दावा किया था कि ‘कमजोर’ हो चुके मोदी को अब भाजपा की वर्चस्‍ववादी राजनीति में नरमी लाने को बाध्‍य होना पड़ेगा। तात्‍कालिक विश्‍लेषण की शक्‍ल में जाहिर यह सदिच्‍छापूर्ण सोच आज बुलडोजर के पैदा किए राष्‍ट्रीय मलबे में कहीं दबी पड़ी है। भारत में कुछ भी नहीं बदला है। हां, तीसरी बार सत्‍ता में आए मोदी को ऐसे विश्‍लेषणों ने एक प्रच्‍छन्‍न वैधता जरूर दे दी, कि यहां लोकतंत्र अभी बच रहा है। प्रोजेक्‍ट सिंडिकेट के सौजन्‍य से देबासीश रॉय चौधरी का लेख

Wife and two sons of deceased Ajay Prajapati

चंदौली में हत्‍या: जाति की जमीन पर जरायम की जजमानी का जिंदा सियासी इतिहास

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जमीन के झगड़े में हुई मामूली सी दिखने वाली एक हत्या कैसे किसी इलाके में सामंतवाद और दबंग जातियों को मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण के धागे खोल कर रख देती है, चंदौली के धानापुर का अजय प्रजापति हत्‍याकांड इसका ताजा उदाहरण है। इस मर्डर केस में आरोपितों द्वारा पीड़ित परिवार दी गई महज एक धमकी ने न सिर्फ करजरा गांव, बल्कि समूचे पूर्वांचल में जाति, जुर्म, जमीन और इसकी सियासत के समीकरण का चार दशक पुराना इतिहास जिंदा कर डाला है। चंदौली और गाजीपुर से लौटकर शिव दास की अविकल जमीनी रिपोर्ट

BJP Office in Durgapur set on fire by TMC members

पश्चिम बंगाल: न सांप्रदायिकता हारी है, न विकास जीता है

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पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में चार दलों के होने के बावजूद मतदाताओं के लिए महज भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आर-पार बंट गया लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद अब हिंसक रंग दिखा रहा है। केंद्र में सरकार बन चुकी है, लेकिन मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे ‘अवैध और अलोकतांत्रिक’ करार दिया है। भाजपा फिलहाल चुप है, लेकिन बंगाल में उसकी सीटों में आई गिरावट को सांप्रदायिकता पर जनादेश मानना बड़ी भूल होगी। चुनाव परिणामों के बाद बंगाल के मतदाताओं से बातचीत के आधार पर हिमांशु शेखर झा का फॉलो-अप

INDIA candidates from Bihar's Karakat, Ujiyarpur and Begusarai Loksabha

चुनाव में Fake News : बिहार से विपक्ष के प्रत्याशियों की जुबानी फर्जी खबरों की कहानी

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आम चुनाव के अंतिम चरण का प्रचार अब थम चुका है। चार जून को नतीजे आएंगे। क्‍या इस चुनाव पर Fake News का कोई फर्क पड़ा है? क्‍या प्रत्‍याशियों के प्रचार अभियान पर दुष्‍प्रचार का असर पड़ा है? संसदीय चुनाव में खड़े उम्मीदवारों से बातचीत इस समस्या के अनकहे पहलुओं और जमीनी हकीकत को पेश करती है। फेक न्‍यूज पर प्रकाश डालने के साथ बिहार से इंडिया गठबंधन के तीन प्रत्‍याशियों से बातचीत कर रहे हैं डॉ. गोपाल कृष्‍ण

A Musahar family in Varanasi

बनारस : ‘विकास’ की दो सौतेली संतानें मुसहर और बुनकर

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महात्‍मा गांधी कतार के सबसे अंत में खड़े इंसान को सुख, दुख, समृद्धि आदि का पैमाना मानते थे। बनारस के समाज में मुसहर और बुनकर ऐसे ही दो तबके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दस साल की सांसदी और राज में ये दोनों तबके वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में हुए कथित विकास का लिटमस टेस्‍ट माने जा सकते हैं, जो कुछ साल पहले एक साथ भुखमरी की हालत में पहुंच गए थे जब कोरोना आया था। चुनाव से ठीक पहले बुनकरों और मुसहरों की बस्तियों से होकर आईं नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

Manikarnika Ghat Varanasi

दस साल बनारस : क्योटो के सपने में जागता, खुली आंख हारता एक शहर…

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‘बना रहे बनारस’- काशी के लोग न अब यह बात कहते हैं, न ही यहां कोई इसे सुनना पसंद करता है। बनारस का आदमी चौबीसों घंटे महसूस कर रहा है कि बनारस सदियों से जैसा था न तो वैसा रह गया, न आगे ही इसका कुछ बन पाएगा। दस साल से क्‍योटो देखने का सपना संजोए बनारसियों के साथ जो वीभत्‍स खेल हुआ है उसके बाद उनकी स्थिति ऐसी है कि न तो कुछ कहा ही जा रहा है, न कहे बिन रहा ही जा रहा है। फिर भी सब कह रहे हैं, जीतना नरेंद्र मोदी को ही है। बनारस का 2014 से 2024 तक का सफरनामा अभिषेक श्रीवास्‍तव की कलम से

Narendra Modi and Mohan Bhagwat

आत्मनिर्भर भाजपा : क्या नाक से बड़ी हो चुकी है नथ?

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भाजपा अब अपने बूते काम करने में समर्थ है और आरएसएस पर उसकी निर्भरता नहीं रही- सत्‍ताधारी पार्टी का अध्‍यक्ष अपनी मातृ संस्‍था पर ऐसा बयान देकर निकल जाए और देश में कहीं चूं तक न हो? ऐसा ही बयान यदि कांग्रेस अध्‍यक्ष ने गांधी परिवार के बारे में दिया होता तो विवाद की सहज कल्‍पना की जा सकती है। क्‍या हैं इस बयान के निहितार्थ? संघ-भाजपा के रहस्‍यमय रिश्‍तों पर व्‍यालोक की पड़ताल