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Mother of a victim of Hamirpur Double Rape 2024 in her home

यूपी : बेहतर कानून व्यवस्था के छद्म को भेद रहा है आधी आबादी पर फैलता हुआ अंधेरा

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उत्‍तर प्रदेश में भाजपा को वोट देने का इकलौता कारण बेहतर लॉ ऐंड ऑर्डर का दावा है। इस दावे के पीछे दर्जनों आत्‍महत्‍याएं और हजारों बलात्‍कार छुपा लिए गए हैं। कानून वाकई इतना चाक-चौबंद है कि बलात्‍कार के बाद लड़कियां रहस्‍यमय ढंग से मर जा रही हैं, उनके बाप इंसाफ न मिलने पर खुदकशी कर ले रहे हैं और पुलिस दोनों को आत्‍महत्‍या बताकर केस बंद कर दे रही है। बीती फरवरी में हुआ हमीरपुर डबल रेप कांड ऐसी ही तीन मौतें लेकर आया था। चार दशक बाद कोई प्रधानमंत्री हमीरपुर गया, लेकिन केवल नदी जोड़ने की बात कर के चला आया। बलात्‍कृत-मृत दलित लड़कियों के टूटे हुए परिजन ताकते ही रह गए। नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

Unnao Gangrape 2022 victim's house

उन्नाव गैंगरेप 2022 : चुनाव आ गया, इस दरवाजे अब तक कोई नहीं आया…

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उन्‍नाव में चुनाव है। हाथरस में हो चुका। बांदा में 20 मई को होना है। ऐसे तमाम शहरों को एक चीज जोड़ती है- बलात्‍कार। बीते बरसों में उत्‍तर प्रदेश में जितने जघन्‍य रेप कांड हुए हैं, और कहीं नहीं हुए। सबसे ज्‍यादा हल्‍ला भी यहीं मचा। ज्‍यादातर कांड दलित औरतों के साथ हुए हैं। विडम्‍बना है कि इस आम चुनाव में दलित वोटों के पीछे पड़े सत्‍ता और विपक्ष दोनों को वे दलित परिवार याद नहीं जो बरसों से अपने ही घर में कैद हैं, घुट रहे हैं, लगातार जुल्‍म झेल रहे हैं। ग्‍यारह साल की दलित बच्‍ची से 2022 में उन्‍नाव में हुए गैंगरेप पर नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

Nitish and Modi together on a hoarding

बिहार : संघ-भाजपा की दाल यहां अकेले क्यों नहीं गल पाती है?

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पिछले आम चुनाव में बिहार में एक को छोड़कर सारी सीटें जीतने वाले एनडीए के पास इस बार बहुत कुछ पाने को नहीं है, लेकिन गिरने की गुंजाइश बरकरार है। नरेंद्र मोदी की 12 मई को पटना में होने वाली भव्‍य रैली संभव है इस गिरावट को थाम ले, लेकिन सवाल है कि मोदी लहर और हिंदुत्‍व के चरम उभार के दौर में भी बिहार में भाजपा को गठबंधन का सहारा क्‍यों लेना पड़ रहा है? क्‍या चीज भाजपा के लिए बिहार को हिंदी पट्टी में अपवाद बनाए हुए है? और क्‍या अगले साल अपने दम पर बिहार में भाजपा सरकार बना सकेगी? राहुल कुमार गौरव की पड़ताल

Vijayadashmi celebrations of RSS in Nagpur, 2023

निन्यानबे का फेर : फीकी रामनवमी, कम मतदान और भागवत बयान की चुनावी गुत्‍थी

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आरएसएस का शताब्‍दी वर्ष समारोह न मनाने का सरसंघचालक मोहन भागवत का बयान पहले चरण के मतदान से ठीक पहले आया। तब से दो चरण हिंदी पट्टी में ठंडे गुजर चुके हैं। रामनवमी के जुलूसों से भी चुनाव में गर्मी नहीं आ सकी क्‍योंकि राम मंदिर अब लोगों के आत्‍मसम्‍मान का सवाल नहीं रहा। भगवान अब टेंट में नहीं हैं। तो क्‍या संघ इस लोकसभा चुनाव में बैठ गया है? और क्‍या भाजपा को राम मंदिर का बन जाना पच नहीं पा रहा कि मोदी लौट-लौट कर अयोध्‍या जा रहे हैं? अमन गुप्‍ता की रिपोर्ट

Fire at landfill site of Ghazipur on Delhi-UP border

पश्चिमी यूपी, दूसरा चरण: कचरे में आग लग चुकी है, फैलते धुएं में आठ क्षेत्रों का सीटवार आकलन

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पहले चरण के कम मतदान प्रतिशत ने अचानक सभी राजनीतिक दलों को सक्रिय कर दिया है। दोनों तरफ से पारा चढ़ाया जा रहा है। संघ प्रमुख से लेकर मुख्‍य न्‍यायाधीश तक को सौ परसेंट मतदान की अपील करनी पड़ रही है तो भाजपा का पुराना खमीर सतह पर आ चुका है। ऐसे में उत्‍तर प्रदेश की अगली आठ सीटों का मुकाबला दिलचस्‍प हो गया है। माजिद अली खान बता रहे हैं सीटवार हिसाब

Loksabha Elections 2024 Phase 1 Western UP

पश्चिमी यूपी, पहला चरण : आठ सीटों पर मुस्लिम वोटों का बिखराव ही तय करेगा भाजपा की किस्मत

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पहले चरण के मतदान में अब केवल तीन दिन बचे हैं लेकिन पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में चुनाव खड़ा नहीं हो पाया है। हालात ये हैं कि यहां समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की पहली साझा प्रेस कॉन्‍फ्रेंस और प्रियंका गांधी की जनसभा प्रचार के आखिरी दिन प्रस्‍तावित है। यहां की आठ सीटों में अधिकतर पर किसी न किसी तीसरी ताकत ने विपक्षी गठबंधन और भाजपा दोनों को असमंजस में डाल रखा है। लिहाजा, वोटर बिलकुल खामोश है और प्रेक्षक भ्रमित। यूपी में पहले चरण का सीट दर सीट तथ्‍यात्‍मक आकलन वरिष्‍ठ पत्रकार माजिद अली खान की नजर से

Symbol of BJP painted on childran's face

अमेरिका से लेकर भारत तक अपने नेता के साये में जॉम्बी बनते राजनीतिक दल

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अपनी राजनीतिक पार्टी की मशीनरी को पूरी तरह हाइजैक कर लेना तानाशाहों में तब्‍दील हो रहे तमाम लोकप्रिय नेताओं का शगल बन चुका है। डोनाल्‍ड ट्रम्‍प अकेले ऐसे दक्षिणपंथी नेता नहीं हैं जिन्‍होंने अपनी पार्टी को अपनी मनमर्जी के अधीन कर डाला है। हंगरी, नीदरलैंड्स, फ्रांस से लेकर भारत तक सूची लंबी है। इतिहास गवाह है कि देश में निरंकुश शासन लगाने की ओर पहला तार्किक कदम पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र खत्‍म कर के उसे तानाशाही में बदलना होता है। राजनीतिक दर्शन के विद्वान यान-वर्नर म्‍यूलर की टिप्‍पणी

भारत में धनकुबेरों का फैलता राज और बढ़ती गैर-बराबरी: पिछले दस साल का हिसाब

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प्रतिष्ठित अर्थशास्‍त्री थॉमस पिकेटी ने भारत में गैर-बराबरी और अरबपतियों के फैलते राज पर एक रिपोर्ट जारी की है। वर्ल्‍ड इनीक्वालिटी लैब से जारी इस रिपोर्ट को पिकेटी के साथ नितिन कुमार भारती, लुकास चैन्सल और अनमोल सोमंची ने मिलकर लिखा है। पिछले दस वर्षों के दौरान किस तरह भारत धनकुबेरों के तंत्र में तब्‍दील होता गया है और यहां का मध्‍यवर्ग लगभग लापता होने के कगार पर आ चुका है, उसकी एक संक्षिप्‍त तथ्‍यात्‍मक तस्‍वीर फॉलो-अप स्‍टोरीज अपने पाठकों के लिए चुन कर प्रस्‍तुत कर रहा है

पंजाब: बदलती सरकारें, चढ़ता नशा, मरती जवानी

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पांच साल पहले जब मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने ड्रग तस्‍करों को मृत्‍युदंड की सिफारिश की थी, तब लगा था कि उड़ते पंजाब पर लगाम लग जाएगी। फिर सरकार बदली। दस दिन के अंदर नए मुख्‍यमंत्री भगवंत मान ने सूबे को नशामुक्‍त करने की शपथ खाई, तो दिल्‍ली में उन्‍हीं की पार्टी के बड़े नेता शराब घोटाले में अंदर चले गए। अब चुनाव फिर सिर पर हैं तो भाजपा नशामुक्‍त पंजाब का नारा देकर रैलियां निकालने जा रही है। उधर लगातार जारी मौतों के धुंधलके में ड्रग्‍स जब्‍ती के सरकारी आंकड़े श्‍मशान की राख से भी हलके नजर आते हैं। पंजाब से मनदीप पुनिया की ग्राउंड रिपोर्ट

‘महुआ दीदी चुप नहीं बैठेंगी!’ अपनी महिला सांसद के निष्कासन पर गरमा रहा है बंगाल

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महुआ मोइत्रा को संसद से निष्कासित किए जाने के बाद समूचा राजनीतिक विपक्ष तो इस कदम का विरोध कर ही रहा है, वहीं समूचे बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन भी जारी है। बंगाल के आम लोग भी इस कदम को भाजपा का राजनीतिक बदला बता रहे हैं। राजधानी कोलकाता से लेकर बंगाल के गांव-कस्‍बों में सार्वजनिक स्थानों पर चल रही सियासी चर्चाओं का हाल बता रहे हैं नित्‍यानंद गायेन