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Collective rites of 13 tribals killed in Kalinganagar in January 2006

कलिंगनगर हत्याकांड: बीस साल बाद भी जिंदा संघर्षों में धधक रही हैं 13 आदिवासियों की चिताएं

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जो लोग यूं ही मर जाते हैं, जिंदा लोग उनको स्‍मृतियों में संजोते हैं। जो लोग लड़ते हुए मारे जाते हैं उन्‍हें संजोना नहीं पड़ता। उलटे, वे भविष्‍य के संघर्षों को जिंदा रखने का काम करते हैं। ओडिशा का कलिंगनगर इसका गवाह है जहां के आदिवासी बीस साल पहले पुलिस के हाथों शहीद हुए अपने पुरखों की लड़ाई को सब कुछ गंवाकर आज भी कायम रखे हुए हैं। उनके पैर के नीचे से जमीन जा चुकी है और सिर से आकाश, लेकिन जिंदगी की उम्‍मीदें हर रोज धरनों, सभाओं और कंपनी राज के दमन में हरी हैं। लंबे समय से ओडिशा के जनसंघर्षों को दर्ज कर रहीं रंजना पाढ़ी की कलिंगनगर नरसंहार की बीसवीं बरसी पर लंबी कहानी

रामलला के स्वागत से पहले उनकी अयोध्या उजड़ रही है, उनकी प्रजा उखड़ रही है…

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राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख आ चुकी है। आधुनिक दौर में इस देश की राजनीति को परिभाषित करने वाली तीन दशक पुरानी इकलौती घटना जनवरी के तीसरे हफ्ते में अपनी परिणति पर पहुंच जाएगी। बस, उसके उत्‍सव में अयोध्‍यावासी नहीं होंगे। वे कहीं जा चुके होंगे, यदि बचे होंगे तब। अयोध्‍या में विकास और मंदिर के नाम पर लोगों को उजाड़ने का जो भयावह खेल चल रहा है, उसकी पड़ताल कर रहे हैं वहां से लौटे गौरव गुलमोहर

1. इंफाल में मैतेयी समुदाय का धरना प्रदर्शन | 2 जुलाई | रोहिण कुमार

मणिपुर: आग लगाने की तैयारी तो पहले से थी, 3 मई की रैली होती या नहीं…

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मणिपुर में दो समुदायों के बीच हिंसा को जल्‍द ही तीन महीने पूरे हो जाएंगे। प्रधानमंत्री ने केवल एक वाक्‍य अब तक कहा है, वो भी संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले, संसद के बाहर, भीतर नहीं। सुप्रीम कोर्ट शुरू में लापरवाह रहा, फिर सख्‍त हुआ, लेकिन उसका कुछ हासिल नहीं है। उधर, दर्द और हिंसा की कहानियां दोनों तरफ से बराबर आ रही हैं। संवेदना पाले में बंट गई है। सच्‍चाई धुंधली हो गई है। ऐसे में मणिपुर से लौटकर रोहिण कुमार सुना रहे हैं आंखों देखी, कानों सुनी और महसूस की हुई कहानियां किस्‍तों में। पहली कड़ी प्रस्‍तुत है

बनारस: नहीं मिले सर्व सेवा संघ के लोगों से मोदी, ज्ञापन गंगा के हवाले, केस सुप्रीम कोर्ट के

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बनारस में सर्व सेवा संघ के ऊपर भाजपा की पहली सरकार के समय से जारी कब्‍जे की कोशिशें इस बार रंगत ला रही हैं। हाइकोर्ट ने गांधीवादियों की याचिका ठुकरा दी है। प्रशासन और रेलवे चौकस हैं। परिसर खाली करने का नोटिस चिपका हुआ है। यह सब कुछ स्‍थानीय सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट के नाम पर किया जा रहा है जिसमें विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण को जालसाज ठहरा दिया गया है

बनारस: 22 साल पुरानी परियोजना में जमीन कब्जाने के लिए पहली बार चली लाठी, फूटे सिर

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कई ग्रामीणों को हिरासत में लिया गया है। कुछ ग्रामीण घायल भी हुए हैं। ग्रामीणों की पत्‍थरबाजी में पुलिस को चोट लगने की बात भी सामने आ रही है। पिछले दो दशक के दौरान यह परियोजना विभिन्‍न कारणों से उठती गिरती रही है लेकिन पहली बार यहां ऐसी हिंसा हुई है।

बाग बाग में आग

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पूर्वांचल में मुआवजा न लेने और जमीन न देने के नारे के साथ खिरिया बाग से शुरू हुआ किसानों का आंदोलन अंडिका बाग के आंदोलन के लिए नजीर बन चुका है।