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A Boatman at Sangam

कुम्भ-2025: एक अपराधी की सरकारी प्रेरक-कथा में छुपी मल्लाहों की सामूहिक व्यथा

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कुम्‍भ के दौरान एक नाविक की पैंतालीस दिन में हुई तीस करोड़ रुपये की कमाई वाला यूपी के मुख्‍यमंत्री का असेंबली में दिया बयान इलाहाबाद के मल्‍लाहों के गले की फांस बन गया है। डेढ़ महीने के कुम्‍भ में बमुश्किल औसतन बीस-पचीस हजार रुपया कमा पाने वाले अधिसंख्‍य नाविक प्रशासन और ठेकेदारों के आपराधिक गठजोड़ तले दम तोड़ रहे हैं, जिसने नदी पर आश्रित समुदाय की आजीविका के सारे स्रोत ठेके पर उठा दिए हैं। कुम्‍भ के आयोजन के नाम पर इस बार जो कुछ भी हुआ है, पिंटू महारा उस मॉडल को समझने का प्रतीक है। संगम से सुशील मानव की फॉलो-अप रिपोर्ट

Chutka Nuclear Plant

इनकार और इज्जत की जिंदगी पर बाजार भारी, चुटका के लोगों को दोबारा उजाड़ने की मुकम्मल तैयारी

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परमाणु हथियारों के खिलाफ अभियान चलाने वालों को शांति का नोबेल देकर दुनिया के बड़े देश वापस परमाणु ऊर्जा की ओर लौट आए, तो भारत ने भी जन-प्रतिरोध के चलते बरसों से अटकी परियोजनाओं को निपटाने के लिए कमर कस ली। पहली बार किसी राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को न्‍यूक्लियर प्‍लांट लगाने के काम में तैनात किया गया, और नतीजा सामने है। अपने अधिकारों, अपनी जिंदगी और अपनी आजीविका के लिए बरसों चली आदिवासियों की लड़ाई अब खत्‍म होने को है। बस दो पैसा ज्‍यादा मुआवजे का सवाल है, वरना मध्‍य प्रदेश के मंडला जिले के गांव के गांव अपना सामान फिर से बांध चुके हैं। यहां परमाणु प्‍लांट लगना है, तो लौटकर आने का सवाल ही नहीं है। संवैधानिक अधिकारों पर ऊर्जा-बाजार की जीत का चुटका प्रसंग आदित्‍य सिंह की कलम से

प्रयागराज: गरीबी, गंदगी और जहालत में मरते रहे मुसहर, ‘बिगड़े रहे देवता’ लोकतंत्र के…

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पूरे अगस्‍त हुई बारिश के बीच उत्‍तर प्रदेश में मुसहर और सहरिया समुदायों के बच्‍चे बेहद मामूली बीमारियों से मरते रहे। उल्‍टी, दस्‍त, आदि के कारण हुई मौतों से चौतरफा इनके गांवों में मातम छाया रहा, लेकिन न तो ग्राम प्रधान झांकने आए और न ही स्‍थानीय लोकसेवकों ने कोई खोज-खबर ली। महीने के आखिरी दिन प्रदेश सरकार विमुक्‍त जन दिवस का उत्‍सव मनाकर अपनी जिम्‍मेदारी से मुक्‍त हो गई। प्रयागराज के गांवों से सुशील मानव की रिपोर्ट

BJP Office in Durgapur set on fire by TMC members

पश्चिम बंगाल: न सांप्रदायिकता हारी है, न विकास जीता है

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पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में चार दलों के होने के बावजूद मतदाताओं के लिए महज भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आर-पार बंट गया लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद अब हिंसक रंग दिखा रहा है। केंद्र में सरकार बन चुकी है, लेकिन मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे ‘अवैध और अलोकतांत्रिक’ करार दिया है। भाजपा फिलहाल चुप है, लेकिन बंगाल में उसकी सीटों में आई गिरावट को सांप्रदायिकता पर जनादेश मानना बड़ी भूल होगी। चुनाव परिणामों के बाद बंगाल के मतदाताओं से बातचीत के आधार पर हिमांशु शेखर झा का फॉलो-अप

A Musahar family in Varanasi

बनारस : ‘विकास’ की दो सौतेली संतानें मुसहर और बुनकर

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महात्‍मा गांधी कतार के सबसे अंत में खड़े इंसान को सुख, दुख, समृद्धि आदि का पैमाना मानते थे। बनारस के समाज में मुसहर और बुनकर ऐसे ही दो तबके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दस साल की सांसदी और राज में ये दोनों तबके वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में हुए कथित विकास का लिटमस टेस्‍ट माने जा सकते हैं, जो कुछ साल पहले एक साथ भुखमरी की हालत में पहुंच गए थे जब कोरोना आया था। चुनाव से ठीक पहले बुनकरों और मुसहरों की बस्तियों से होकर आईं नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

Manikarnika Ghat Varanasi

दस साल बनारस : क्योटो के सपने में जागता, खुली आंख हारता एक शहर…

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‘बना रहे बनारस’- काशी के लोग न अब यह बात कहते हैं, न ही यहां कोई इसे सुनना पसंद करता है। बनारस का आदमी चौबीसों घंटे महसूस कर रहा है कि बनारस सदियों से जैसा था न तो वैसा रह गया, न आगे ही इसका कुछ बन पाएगा। दस साल से क्‍योटो देखने का सपना संजोए बनारसियों के साथ जो वीभत्‍स खेल हुआ है उसके बाद उनकी स्थिति ऐसी है कि न तो कुछ कहा ही जा रहा है, न कहे बिन रहा ही जा रहा है। फिर भी सब कह रहे हैं, जीतना नरेंद्र मोदी को ही है। बनारस का 2014 से 2024 तक का सफरनामा अभिषेक श्रीवास्‍तव की कलम से

राम घर आ रहे हैं, कौशल्या फुटपाथ पर हैं! पुरुषोत्तम और जगन्नाथ भी…

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यह सच है कि अठारह सौ करोड़ की लागत से बन रहा राम मंदिर, तीस हजार करोड़ की लागत से हो रहा अयोध्‍या का विकास और अपेक्षित तीन लाख श्रद्धालुओं के भारी-भरकम आंकड़े से यहां के रेहड़ी-पटरी वालों और दुकानदारों का काम-धंधा बढ़ेगा। यह भी सच है कि राम मंदिर के कारण अपनी रोजी-रोटी कमा पा रहे लोग मंदिर बनने से खुश हैं। इसके बाद तीसरा सच भी कुबूल कर ही लेना चाहिए- कि हजारों लोगों से उनकी दुकानें छिन गई हैं और जब धंधा बढ़ने का मौका आया है ठीक तभी वे फुटपाथ पर डाल दिए गए हैं। अयोध्‍या से नीतू सिंह की फॉलो-अप रिपोर्ट

शिवराज के सपनों का ‘अद्वैतलोक’ : जहां सत्य, शिव और सुंदर के अलावा सब कुछ है

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हर नेता अपनी जिंदगी में कम से कम एक प्रतिमा गढ़ना चाहता है। शिवराज सिंह चौहान ने भी एक प्रतिमा गढ़ी- 108 फुट ऊंची आदि शंकराचार्य की। शिव के मस्तक में मशीनों से छेद कर के खड़ी की गई इस प्रतिमा ने संघ के कार्यकर्ताओं को फिरंट कर दिया, जंगलों को नष्ट कर दिया, पहाड़-घाटी के लोगों को उजाड़ दिया। बाढ़ और मानवीय त्रासदी के बीच लोकार्पित की गई तीन हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना पर खंडवा के ओंकारेश्वर से लौटकर अमन गुप्ता की लंबी कहानी

G-20 के लिए लोगों को उजाड़ने के खिलाफ बोलना भी जुर्म, दिल्ली में रुकवा दिया गया We-20 सम्मेलन

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दिल्‍ली से लेकर वृंदावन, अयोध्‍या, बनारस, ओडिशा, बंगाल यानी समूचे देश में लोगों को उजाड़ा जा रहा है। बहाना है आगामी सितंबर में होने वाला जी-20 शिखर सम्‍मेलन और उसके लिए शहरों का सुंदरीकरण। इस बेदखली, विस्‍थापन और बेघरी के खिलाफ 700 से ज्‍यादा लोग दिल्‍ली में तीन दिन बंद कमरे में विचार-विमर्श करने को जुटे थे। दिल्‍ली पुलिस ने दूसरे दिन माहौल बिगाड़ा और तीसरे दिन के सत्र को होने ही नहीं दिया। यह सम्‍मेलन आधे में ही खत्‍म हो गया।

रामलला के स्वागत से पहले उनकी अयोध्या उजड़ रही है, उनकी प्रजा उखड़ रही है…

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राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख आ चुकी है। आधुनिक दौर में इस देश की राजनीति को परिभाषित करने वाली तीन दशक पुरानी इकलौती घटना जनवरी के तीसरे हफ्ते में अपनी परिणति पर पहुंच जाएगी। बस, उसके उत्‍सव में अयोध्‍यावासी नहीं होंगे। वे कहीं जा चुके होंगे, यदि बचे होंगे तब। अयोध्‍या में विकास और मंदिर के नाम पर लोगों को उजाड़ने का जो भयावह खेल चल रहा है, उसकी पड़ताल कर रहे हैं वहां से लौटे गौरव गुलमोहर